एमपी के वाइल्ड लाइफ विजन के नायक बने सीएम मोहन यादव

भोपाल। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के दृढ़ संकल्प और दूरदर्शी सोच से प्रदेश के वन्यजीव संरक्षण इतिहास में मंगलवार को एक नया स्वर्णिम अध्याय जुड़ गया। मुख्यमंत्री ने कान्हा टाइगर रिजर्व के सूपखार क्षेत्र में असम के काजीरंगा से लाए गए जंगली भैंसों को सॉफ्ट रिलीज कर बहुप्रतीक्षित जंगली भैंसा पुनस्र्थापना योजना का भव्य शुभारंभ किया। लगभग एक शताब्दी 100 वर्ष के लंबे इंतजार के बाद मध्य प्रदेश की धरती पर जंगली भैंसों की दहाड़ फिर सुनाई देगी।
इस ऐतिहासिक अवसर पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि आज का दिन प्रदेश के लिए अद्भुत है। उन्होंने बताया कि अपनी असम यात्रा के दौरान उन्होंने वहां के मुख्यमंत्री डॉ. हेमंत विस्वा सरमा से इस विषय पर सार्थक चर्चा की थी, जिसके सकारात्मक परिणाम आज सामने हैं। सीएम ने कहा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में हमारी सरकार विलुप्त हो रही प्रजातियों को वापस लाने के मिशन पर काम कर रही है। इन जंगली भैंसों के आने से न केवल हमारा इको.सिस्टम मजबूत होगा, बल्कि स्थानीय स्तर पर पर्यटन और रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे।
कान्हा ही क्यों?
मुख्यमंत्री ने बताया कि भारतीय वन्यजीव संस्थान देहरादून के अध्ययन में कान्हा टाइगर रिजर्व को जंगली भैंसों के लिए सबसे अनुकूल पाया गया है। यहां के विस्तृत घास के मैदान और पर्याप्त जल स्रोत इनके फलने फूलने के लिए सर्वथा उपयुक्त हैं। 100 साल पहले ये प्रजाति यहां से विलुप्त हो गई थी, जिसे डॉ. मोहन यादव की सरकार ने फिर से जीवन दिया है।
2000 किमी का सफर कर आए
असम से कान्हा तक का यह सफर किसी चुनौती से कम नहीं था।
प्रथम चरण: 19 मार्च से 10 अप्रैल 2026 के बीच काजीरंगा से 7 किशोर भैंसों का चयन किया गया।
लंबी यात्रा: 25 अप्रैल को 4 जंगली भैंसों 3 मादा और 1 नर ने 2000 किलोमीटर का सफर तय कर कान्हा की धरती पर कदम रखा।
सुरक्षा: पूरे सफर में वरिष्ठ अधिकारियों और विशेषज्ञ पशु चिकित्सकों की टीम साथ रही। आज सीएम ने इन्हें विशेष बाड़े में सुरक्षित रूप से मुक्त किया।
हर क्षेत्र में मिसाल पेश कर रहा है एमपी
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मीडिया से चर्चा में गर्व के साथ कहा कि मध्य प्रदेश आज दुनिया में वन्यप्राणी संरक्षण का मॉडल बन चुका है। उन्होंने कहा हम सिर्फ टाइगर और चीता स्टेट ही नहीं हैं, बल्कि हम मगरमच्छ, घडिय़ाल, भेडय़िा और अब वल्चर गिद्ध स्टेट भी हैं। कूनो और गांधी सागर के बाद अब नौरादेही में चीतों को बसाने की तैयारी है। हमारा लक्ष्य अपनी भावी पीढ़ी को एक समृद्ध और सुरक्षित प्राकृतिक धरोहर सौंपना है।
सांसद और प्रशासनिक अधिकारियों की मौजूदगी
इस गौरवशाली पल के दौरान सांसद भारती पारधी, भगत सिंह नेताम सहित वन विभाग के आला अधिकारी और स्थानीय प्रशासन मौजूद रहा। सूपखार के जंगलों में मुख्यमंत्री के हाथों इन वन्यजीवों की मुक्ति ने यह संदेश साफ कर दिया है कि डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में मध्य प्रदेश विकास के साथ-साथ पर्यावरण संतुलन में भी देश का नेतृत्व कर रहा है।



