मध्यप्रदेश

पीएचक्यू के आदेश ठंडे बस्ते में…

सीहोर। पुलिस मुख्यालय मध्य प्रदेश द्वारा जारी किए गए कड़े दिशा-निर्देश और स्थानांतरण आदेश सीहोर जिले में बेअसर साबित हो रहे हैं। पुलिस स्थापना बोर्ड के अनुमोदन के बाद प्रदेश के निरीक्षकों और कार्यवाहक निरीक्षकों को नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में भेजने के लिए करीब एक महीना पहले एक सूची जारी की गई थी। इस सूची में सीहोर जिले के दो वरिष्ठ कार्यवाहक निरीक्षकों का नाम भी शामिल था, जिन्हें नक्सल प्रभावित जिला बालाघाट भेजा गया था। लेकिन हैरत की बात यह है कि आदेश जारी हुए एक महीने से अधिक का समय बीत चुका है और ये दोनों अधिकारी अब तक सीहोर से रवाना नहीं हुए हैं। मुख्यालय के निर्देशों के बाद भी इनका अपनी पुरानी जगह पर डटे रहना अब चर्चा का विषय बन गया है।
बता दें पुलिस मुख्यालय भोपाल द्वारा यह आधिकारिक आदेश 24 अप्रैल 2026 को जारी किया गया था। रोटेशन नीति के तहत सीहोर जिले में पदस्थ कार्यवाहक निरीक्षक राजेश कहारे (सूची क्रमांक 11) और कार्यवाहक निरीक्षक पंकज कुमार वाडेकर (सूची क्रमांक 13) का तबादला अस्थाई रूप से आगामी आदेश तक जिला बालाघाट में किया गया था। नियमानुसार इन्हें तत्काल अपनी नई पदस्थापना पर आमद दर्ज करानी थी, लेकिन पूरा मई का महीना बीत जाने के बाद भी इन अधिकारियों ने सीहोर से अपनी रवानगी नहीं डाली है।
पीएचक्यू के ‘तत्काल कार्यमुक्त’ करने के निर्देश पड़े ठंडे
पुलिस महानिदेशक के हस्ताक्षर से जारी इस आदेश में साफ तौर पर लिखा गया था कि मध्य प्रदेश शासन सामान्य प्रशासन विभाग की स्थानांतरण नीति के तहत संबंधित अधिकारियों को तय समयावधि के भीतर अनिवार्य रूप से कार्यमुक्त किया जाए। आदेश में यह भी स्पष्ट था कि यदि कोई अधिकारी वर्तमान में सस्पेंड (निलंबित) है, केवल उसी स्थिति में उसे कार्यमुक्त नहीं किया जाएगा और मुख्यालय को इसकी सूचना दी जाएगी। ऐसे में जब सीहोर के इन दोनों अफसरों पर निलंबन जैसी कोई कार्रवाई नहीं है तो एक महीने बाद भी इन्हें कार्यमुक्त न किए जाने से पुलिस महकमे की प्रशासनिक कसावट और सीहोर पुलिस प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
नक्सल प्रभावित क्षेत्रों की रोटेशन नीति को लग रहा झटका
विभाग के इस रवैये के कारण पुलिस मुख्यालय की उस महत्वपूर्ण नीति को झटका लग रहा है, जिसके तहत कानून व्यवस्था को मजबूत करने के लिए अधिकारियों को दो वर्ष के लिए नक्सल प्रभावित क्षेत्रों बालाघाट और मण्डला में भेजा जाता है। जहां एक तरफ बालाघाट में 2 साल की कठिन सेवा पूरी कर चुके अधिकारी मैदानी इलाकों में लौटने का इंतजार कर रहे हैं, वहीं सीहोर से भेजे गए इन अधिकारियों की रवानगी न होने से वहां की प्रशासनिक व्यवस्था भी प्रभावित हो रही है।

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