मीनाक्षी नटराजन का फॉर्म रिजेक्ट होने का मामला पहुंचा हाई कोर्ट, दांव पर लगी तीनों नवनिर्वाचित सांसदों की कुर्सी

भोपाल। राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन का नामांकन फॉर्म खारिज होने का हाई प्रोफाइल मामला अब मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की दहलीज पर पहुंच गया है। सुप्रीम कोर्ट और चुनाव आयोग से फौरी राहत न मिलने के बाद कांग्रेस अब इसी सप्ताह हाई कोर्ट में इलेक्शन पिटीशन दायर करने जा रही है। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने साफ कर दिया है कि पार्टी इस कानूनी लड़ाई को मजबूती से लड़ेगी और जल्द ही कोर्ट का दरवाजा खटखटाएगी।
हाई कोर्ट में याचिका दाखिल करने की तैयारियां अंतिम चरण में हैं। चुनाव याचिका के नियमों के तहत इसके साथ चुनाव आयोग और रिटर्निंग ऑफिसर द्वारा जारी आदेशों की सर्टिफाइड कॉपी लगाना कानूनी रूप से अनिवार्य है। इन जरूरी सरकारी दस्तावेजों को हासिल करने और याचिका का फाइनल ड्राफ्ट तैयार करने में 5 से 7 दिन का समय लग रहा है। उम्मीद जताई जा रही है कि इसी हफ्ते इसे कोर्ट में पेश कर दिया जाएगा।
तो क्या छिन जाएगी जीते हुए तीनों सांसदों की सदस्यता
इस पूरे मामले में सबसे बड़ा कानूनी पेंच यह है कि अगर हाई कोर्ट में मीनाक्षी नटराजन के पक्ष में फैसला आता है तो चुनाव जीत चुके अन्य उम्मीदवारों की मुश्किलें बेहद बढ़ जाएंगी। राज्यसभा सांसद और सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील विवेक तन्खा के अनुसार चुनाव कानून के मुताबिक नामांकन रद्द होने के खिलाफ जब भी कोई इलेक्शन पिटीशन दायर होती है तो उस चुनाव में जीत हासिल करने वाले सभी प्रत्याशियों को विरोधी पक्ष बनाना अनिवार्य होता है। यदि हाई कोर्ट अपनी सुनवाई और जांच में यह पाता है कि मीनाक्षी नटराजन का नामांकन गलत तरीके से निरस्त किया गया था तो कोर्ट चुनाव जीत चुके तीनों प्रत्याशियों का निर्वाचन रद्द कर देगा। ऐसी स्थिति में तीनों की राज्यसभा सदस्यता चली जाएगी और इस सीट पर नए सिरे से चुनाव कराना होगा।
अब इलेक्शन पिटीशन ही एकमात्र कानूनी रास्ता
गौरतलब है कि नामांकन रद्द होने के तुरंत बाद कांग्रेस राहत के लिए सुप्रीम कोर्ट पहुंची थी और रिट पिटीशन लगाई थी। हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने इस पर सुनवाई करते हुए स्पष्ट कर दिया था कि संविधान का अनुच्छेद 329 चुनाव प्रक्रिया में अदालतों के सीधे हस्तक्षेप को सीमित करता है। इसलिए इस मामले में सीधे रिट पिटीशन पर सुनवाई नहीं हो सकती। सुप्रीम कोर्ट ने साफ रास्ता दिखाया था कि अगर फैसले पर आपत्ति है तो मीनाक्षी नटराजन नियमानुसार चुनाव याचिका दाखिल कर इसे चुनौती दे सकती हैं। इसी के बाद अब कांग्रेस हाई कोर्ट का रुख कर रही है।



