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कलेक्टर साहब की मीटिंग में सब ओके, धरातल पर पानी ही पानी

सीहोर। जिला प्रशासन और नगर पालिकाओं द्वारा मानसून से पहले किए गए तैयारियों के तमाम दावे पहली ही तेज बारिश में बह गए। कलेक्टर हर समय सीमा की बैठक में एक महीने पहले से ही मातहत अधिकारियों को बारिश से पूर्व सारे इंतजाम दुरुस्त करने के निर्देश दे रहे थे। बैठक में बैठे अधीनस्थ अधिकारी भी सीना तानकर सब कुछ ओके की रिपोर्ट थमा देते थे, लेकिन अब इस ओके रिपोर्ट की असली पोल धरातल पर उतरे पानी ने खोल दी है।
सीहोर मुख्यालय हो, इछावर हो या फिर आष्टा… हर तरफ जलभराव से जनता त्रस्त है। बदहाली का आलम देखकर अब लोग खुलेआम कहने लगे हैं कि वर्तमान व्यवस्था से तो शिवराज सिंह चौहान की सरकार के समय का सरकारी सिस्टम कहीं ज्यादा ठीक था, कम से कम सुनवाई तो होती थी।

महिलाओं और बुजुर्गों ने किया चक्काजाम
मंगलवार को वार्ड क्रमांक 1 के रहवासी पिछले कई सालों से कीचड़, धूल और गड्ढों वाली सडक़ से परेशान हैं। मंगलवार नागरिकों का गुस्सा फूट पड़ा और उन्होंने कोलीपुरा चौराहे पर चक्काजाम कर दिया। इस प्रदर्शन में बड़ी संख्या में महिलाएं और बुजुर्ग शामिल हुए। जाम के कारण स्कूली बसें, दफ्तर जाने वाले लोग और व्यापारिक वाहन घंटों फंसे रहे। रहवासियों का सीधा आरोप है कि जिला प्रशासन नागरिकों को सुविधाएं देने में फेल है।

आष्टा में लगे हाय-हाय के नारे
आष्टा नगर में हुई तेज बारिश के बाद सडक़ों पर तीन फीट से ऊपर पानी बह निकला, जिससे ड्रेनेज सिस्टम की पूरी तरह हवा निकल गई। दुकानों और घरों में पानी घुसने से नाराज व्यापारियों और आम नागरिकों ने नगर पालिका और सीएमओ के खिलाफ जमकर हाय-हाय के नारे लगाए। इस मुद्दे पर अब राजनीति भी गरमा गई है। कांग्रेस नेता हरपाल सिंह ठाकुर ने तंज कसते हुए कहा कि जिस क्षेत्र में जलभराव हुआ, वहां के दोनों पार्षद प्रतिनिधि भाजपा के हैं। उन्होंने कहा कि यह जनता के साथ चोर-सिपाही का खेल हैय अगर सरकार और विधायक नहीं सुन रहे तो इन्हें इस्तीफा दे देना चाहिए।
रबर की ट्यूब पर बैठे पार्षद
सबसे हैरान करने वाली तस्वीर इछावर से आई। महज आधे घंटे की झमाझम बारिश ने मुख्य मार्गों को नदी में तब्दील कर दिया। नालियों का गंदा पानी दुकानों में घुस गया। इस अव्यवस्था के खिलाफ अनोखा विरोध जताते हुए वार्ड-15 के कांग्रेस पार्षद जुनेद खान मुख्य सडक़ पर भरे पानी के बीच रबर के ट्यूब पर बैठकर तैरते नजर आए। स्थानीय लोगों का आरोप है कि नगर परिषद हर साल नाला सफाई के नाम पर लाखों रुपये के बजट की केवल कागजी खानापूर्ति करती है, जिसका खामियाजा जनता भुगत रही है।

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