धर्म और आस्थामध्यप्रदेश

बदली किस्मत: जब कोविड के खौफ ने सीहोर को बना दिया देश का ‘शिवधाम’

सीहोर संडे स्पेशल-नितिन ठाकुर के साथ

सीहोर। वक्त का पहिया जब घूमता है तो कई बार सबसे बड़ी त्रासदी भी इतिहास के पन्नों पर बदलाव की एक नई इबारत लिख जाती है। कुछ ऐसा ही हुआ मध्य प्रदेश के शांत शहर सीहोर के साथ। साल 2021-22 की वह तस्वीर याद कीजिए, जब पूरा देश कोविड-19 की खौफनाक जकड़ में था। सीहोर भी इससे अछूता नहीं था। शहर की सडक़ों पर कफ्र्यू जैसा सन्नाटा पसरा था, गश्त करती पुलिस की गाडिय़ां थीं और हर दिन उठती अर्थियों के बीच हर घर में अपनों को खोने का अनजाना डर छाया था। अस्पतालों में बेड फुल थे और चारों तरफ मायूसी का पहरा था।
लेकिन इसी भयावह सन्नाटे और दहशत के दौर में एक ऐसा मोड़ आया, जिसने न केवल स्थानीय लोगों की दिनचर्या बदली, बल्कि आने वाले समय में पूरे सीहोर शहर का भाग्य और पहचान ही बदलकर रख दी।
दहशत का दौर और कथावाचक पंडित प्रदीप मिश्रा का उभार
जब महामारी के दौर में लोग अपने-अपने घरों में कैद होने को मजबूर थे, तब टीवी के पर्दे पर आस्था चैनल के माध्यम से एक आवाज गूंज रही थी, सीहोर के लाल पंडित प्रदीप मिश्रा की। पंडित प्रदीप मिश्रा, जो इससे पहले स्थानीय स्तर पर घर-धर्मशालाओं में कथाएं करते थे, वे इस दौर में बड़े मंच की ओर कदम बढ़ा रहे थे।

उन दिनों लोगों की जीवनशैली बिल्कुल बदल चुकी थी। रात में 8 से 10 घंटे सोने के बाद दिन के बचे 14 घंटों में से 4 घंटे दैनिक कामकाज में बीतते और शेष 10 घंटे लोग टीवी के सामने गुजारते थे। इस दौरान पंडित प्रदीप मिश्रा द्वारा सुनाए जाने वाले शिव महापुराण के प्रसंग, बेहद सरल-सहज उपाय और वही पुराना रामायण सीरियल लोगों के दिलों में उतरने लगा। डर के माहौल में जब निराशा का बोलबाला था, तब उनके बताए छोटे-छोटे उपायों ने लोगों में आशा और विश्वास की नई किरण जगाई।

काले बादल छंटे और ‘सीहोर वाले बाबा’ की पूरे देश में गूंजी ख्याति
साल 2023 आते-आते जैसे-जैसे कोरोना के काले बादल छंटते गए और महामारी खत्म हुई, वैसे-वैसे देश भर में पंडित प्रदीप मिश्रा की दीवानगी चरम पर पहुंच गई। वे पूरे देश में कथा वाचन करने लगे और लोग उन्हें ‘सीहोर वाले महाराज’ के नाम से जानने लगे।
इसी बीच सीहोर में भव्य ‘कुबेरेश्वर धाम’ आकार लेने लगा। देखते ही देखते देश भर के श्रद्धालु सीहोर आने के लिए आतुर होने लगे। धाम पर पंडित प्रदीप मिश्रा के नेतृत्व में दो बड़े आयोजन प्रमुखता से होने लगे ृपहला भव्य शिवमहापुराण कथा और दूसरा विशाल कांवड़ यात्रा।
आम दिनों में 25 हजार श्रद्धालुओं का डेरा
कुबेरेश्वर धाम के अस्तित्व में आने के बाद सीहोर की रंगत पूरी तरह बदल चुकी है, अब सीहोर में आम दिनों में भी प्रतिदिन 20 से 25 हजार श्रद्धालु देश के अलग-अलग राज्यों से दर्शन और अर्जी लगाने पहुंचते हैं।
जबकि भव्य आयोजनों में श्रद्धालुओं की संख्या लाखों में पहुंच जाती है। इस भारी जनसैलाब को संभालने के लिए पुलिस मुख्यालय भोपाल के आला अफसरों सहित जिले की पुलिस को विशेष सुरक्षा और यातायात इंतजाम करने पड़ते हैं।
25 अगस्त की भव्य कांवड़ यात्रा
इसी कड़ी में आगामी 25 अगस्त को पंडित प्रदीप मिश्रा के नेतृत्व में भव्य कांवड़ यात्रा निकलने जा रही है। आयोजन की विशालता को देखते हुए इंदौर-भोपाल राष्ट्रीय राजमार्ग पर गाडिय़ों के रूट डायवर्ट किए गए हैं। देश भर से बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने का सिलसिला लगातार जारी है।
कुल मिलाकर जिस सीहोर को कभी बेहद कम लोग जानते थे, आज वह देश के धार्मिक मानचित्र पर पूरी मुखरता के साथ उभर कर सामने आ चुका है और अपनी एक नई पहचान बना चुका है।

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