सीहोर में ‘हाईजेक’ हुई मां नर्मदा…

सीहोर। जिले में पवित्र नर्मदा नदी का आंचल रेत माफियाओं के चंगुल में पूरी तरह जकड़ चुका है। आलम यह है कि एनजीटी और प्रशासन के सख्त प्रतिबंध के बावजूद माफियाओं ने सीहोर क्षेत्र में नर्मदा नदी को पनडुब्बियों के जरिए पूरी तरह हाईजैक कर लिया है। मंडी से लेकर छिपानेर तक पूरी नदी पर रेत माफिया का कब्जा है, जहां दिन-रात अवैध उत्खनन का खेल निर्बाध रूप से जारी है।
कलेक्टर बालागुरू के. द्वारा जारी आदेश क्रमांक/2600/खनिज/2026 के तहत मानसून सत्र और पर्यावरण दिशानिर्देशों का हवाला देते हुए 06 जून की मध्य रात्रि से 01 अक्टूबर 2026 तक जिले की सभी रेत खदानों से उत्खनन पूरी तरह प्रतिबंधित किया गया है। स्वीकृत खदान संचालक मेसर्स यूफोरिया माइंस एंड मिनरल्स प्रा.लि. को भी इसके पालन के निर्देश हैं। परंतु जमीनी हकीकत यह है कि जहां न कोई वैध खदान है और न कोई प्रशासनिक मंजूरी, वहां दो दर्जन से भी ज्यादा हैवी पनडुब्बियां नदी के सीने को छलनी कर रही हैं।
इन इलाकों में बेखौफ चल रहा है अवैध कारोबार
भैरूंदा क्षेत्र के मंडी, सीलकंठ, सातदेव, पातालेश्वर मंदिर के पास, रानीपुरा, चौरसाखेड़ी और छिपानेर जैसे इलाकों में रेत माफियाओं ने नर्मदा नदी को पूरी तरह अपने कब्जे में ले रखा है। इन तटों पर बेधडक़ पनडुब्बियां उतारकर नदियों की तली से रेत खींची जा रही है। माफिया इतने बेखौफ हैं कि निकाली गई रेत को सीधे सडक़ों पर पटक दिया जाता है, जिससे ग्रामीणों का आवागमन पूरी तरह बाधित हो चुका है और लोग हादसों का शिकार हो रहे हैं।
बंधुआ मजदूरी कराने का आरोप
नर्मदा नदी को हाईजैक करने वाले इस अवैध तंत्र का सबसे खौफनाक पहलू यह है कि यहां जान जोखिम में डालकर मजदूरों से जबरन काम कराया जा रहा है। सूत्रों के मुताबिक मजदूरों को बंधुआ बनाकर गहरे पानी में उतारे जाने का खेल चल रहा है, जिससे मजदूर और उनके परिवार गहरे डर और दहशत के साए में जीने को मजबूर हैं।
शासन और प्रशासन के कागजी आदेशों के बीच नर्मदा नदी के प्राकृतिक अस्तित्व पर गहरा संकट मंडरा रहा है। अब देखना यह होगा कि जिला प्रशासन और पुलिस विभाग इस ‘हाईजैक’ हो चुकी नर्मदा को माफियाओं के चंगुल से छुड़ाने के लिए क्या ठोस कार्रवाई करता है।



