मोहन सरकार की मंशा पर भारी इछावर के अफसर…

सीहोर। मध्य प्रदेश की डॉ. मोहन यादव सरकार का स्पष्ट निर्देश है कि आम जनता की समस्याओं के निवारण किया जाए। इसके लिए हर मंगलवार को प्रदेशभर के सरकारी दफ्तरों में सुबह 11.00 बजे से दोपहर 1.00 बजे तक जनसुनवाई का समय तय किया गया है, ताकि दूर-दराज से आने वाले ग्रामीण और पीडि़त अपनी समस्याएं सीधे जिम्मेदार अधिकारियों के सामने रख सकें, लेकिन इछावर में प्रशासनिक अधिकारियों की लापरवाही के चलते सरकार की इस व्यवस्था को पलीता लग रहा है।
मंगलवार को जब घड़ी में सुबह के 11.40 बज चुके थे और तहसील कार्यालय में पीडि़त अपनी अर्जियां हाथों में थामे अधिकारियों का इंतजार कर रहे थे, उस वक्त जनसुनवाई की कुर्सी खाली पड़ी थी। तहसील कार्यालय में न तो एसडीएम मौजूद थे और न ही तहसीलदार। अधिकारी अपने दफ्तरों से नदारद मिले, जिससे अपनी समस्याओं के समाधान की उम्मीद लेकर पहुंचे ग्रामीण भटकने को मजबूर दिखे।
राजस्व मंत्री के गृह क्षेत्र का यह हाल
इस पूरे घटनाक्रम का सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि इछावर विधानसभा क्षेत्र मध्य प्रदेश सरकार के सबसे वरिष्ठ नेता और खुद राजस्व मंत्री करण सिंह वर्मा का गृह क्षेत्र है। जब राजस्व मंत्री के अपने ही क्षेत्र में तहसील और अनुभाग स्तर के जिम्मेदार अधिकारी जनसुनवाई के निर्धारित समय पर मौजूद नहीं रहते, तो इससे प्रशासनिक व्यवस्था की ढिलाई साफ उजागर होती है।
साहब के इंतजार में भटकते रहे ग्रामीण
जनसुनवाई में आए कई आवेदकों ने बताया कि वे काफी दूर दराज के गांवों से किराया खर्च करके इस उम्मीद में आए थे कि आज उनकी सुनवाई होगी और जमीनी व राजस्व से जुड़े विवादों का निराकरण मिलेगा। लेकिन दफ्तर पहुंचने पर पता चला कि मुख्य अधिकारी ही मौजूद नहीं हैं। दफ्तर के बाहर घंटों इंतजार करने के बाद कई लोगों को निराश होकर बिना सुनवाई के ही वापस लौटना पड़ा।
उठ रहे गंभीर सवाल
जनसुनवाई जैसे महत्वपूर्ण सरकारी कार्यक्रम में वरिष्ठ अधिकारियों की अनुपस्थिति ने स्थानीय प्रशासन की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि जब राजस्व मंत्री के गृह क्षेत्र इछावर में अफसरों का यह रवैया है तो जिले के अन्य दूरस्थ अंचलों में व्यवस्था की क्या स्थिति होगी, इसका अंदाजा आसानी से लगाया जा सकता है।



