राधा रानी पर घिरे थे पंडित प्रदीप मिश्रा, अब भगवान कृष्ण की तुलना कर फंसे धीरेंद्र शास्त्री

भोपाल। सनातन धर्म और पौराणिक कथाओं के मंचों से उठने वाले विवाद थमने का नाम नहीं ले रहे हैं। कुछ समय पहले पंडित प्रदीप मिश्रा द्वारा राधा रानी पर दिए गए बयान को लेकर देशभर के संतों और श्रद्धालुओं में भारी रोष देखा गया था। उनकी माफी के बाद यह मामला शांत हुआ था कि अब बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री भगवान श्रीकृष्ण की तुलना भगवान राम से करके नए विवाद के घेरे में आ गए हैं।
पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने एक प्रवचन के दौरान भगवान राम और भगवान श्रीकृष्ण के स्वरूप, नाम और कार्यों की तुलना करते हुए कई ऐसी बातें कह दीं, जिस पर अब धार्मिक मंचों और समाज में आपत्ति जताई जा रही है। धीरेंद्र शास्त्री ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण की तस्वीरों में वे हमेशा तीन जगह से टेढ़े पैर के ऊपर पैर, कमर लचकाए और सिर झुकाए दिखाई देते हैं। इसके विपरीत भगवान राम एकदम सीधे और सरल रूप में खड़े दिखाई देते हैं। उन्होंने कहा कि भगवान राम का नाम, चलना और स्वरूप एकदम सीधा है, जबकि भगवान श्रीकृष्ण का नाम, चाल और खड़े होने का ढंग टेढ़ा है।
धाम और कार्यों की तुलना
उन्होंने वृंदावन की तुलना में अयोध्या धाम को सीधा करार दिया। इतना ही नहीं, उन्होंने बांसुरी बजाने को एक साधारण खेल जैसा बताते हुए कहा कि धनुष चलाना कोई आसान या साधारण काम नहीं है। धीरेंद्र शास्त्री के इस तुलनात्मक बयान के बाद श्रीकृष्ण भक्तों और सनातन समाज में नाराजगी देखी जा रही है। आलोचकों का कहना है कि भगवान के प्रत्येक अवतार का अपना आध्यात्मिक महत्व है और त्रिभंगी मुद्रा रसराज श्रीकृष्ण की नटवर मुद्रा है, जिसे टेढ़ा कहकर आंका जाना अनुचित है।
जब राधा रानी पर बयान देकर घिरे थे पंडित प्रदीप मिश्रा
इससे पहले वर्ष 2024 में मशहूर कथावाचक पंडित प्रदीप मिश्रा भी अपने एक बयान को लेकर संतों के निशाने पर आ गए थे। पंडित प्रदीप मिश्रा ने दावा किया था कि राधा जी बरसाना की नहीं, बल्कि रावल गांव की रहने वाली थीं और बरसाना में केवल उनके पिता की कचहरी थी। उन्होंने यह भी कहा था कि राधा जी का विवाह छाता (मथुरा) में अनय घोष के साथ हुआ था और उनकी सास का नाम जटिला व ननद का नाम कुटिला था।
प्रेमानंद महाराज का तीखा प्रहार
प्रदीप मिश्रा के इस बयान पर वृंदावन के संत पूज्य प्रेमानंद जी महाराज ने कड़ी नाराजगी जताई थी। प्रेमानंद महाराज ने सार्वजनिक वीडियो जारी करते हुए तीखा सवाल किया था कि कभी बरसाना गए हो, कभी देखे हो, तुम क्या जानते हो, कितने ग्रंथ पढ़े हो, सिर्फ चापलूसी करके संसार वाले को रिझा सकते हो। राधा रानी जी के बारे में ऐसा मत बोलो, तुम उनकी शक्ति नहीं जानते। राधा जी भोली हैं, लेकिन उनके सेवक काल हैं। प्रेमानंद महाराज के इस कड़े रुख और ब्रजवासियों के व्यापक विरोध के बाद अंतत: पंडित प्रदीप मिश्रा को बरसाना जाकर राधा रानी के चरणों में दंडवत प्रणाम कर क्षमा मांगनी पड़ी थी।



