कोसमी में चौथे दिन भी डटे रहे आदिवासी ग्रामीण, कमिश्नर-कलेक्टर की चर्चा भी रही बेनतीजा

सीहोर। जिले के कोसमी गांव में आदिवासियों का धरना प्रदर्शन अब और भी अधिक आक्रामक रुख अख्तियार करता जा रहा है। अपनी मांगों और न्याय की आस में धरने पर बैठे आदिवासियों का आंदोलन बुधवार को पांचवें दिन भी पूरी मजबूती के साथ जारी रहा। आंदोलन को खत्म कराने और जमीनी हकीकत जानने के लिए बुधवार को खुद कलेक्टर और कमिश्नर प्रशासनिक अमले के साथ मौके पर पहुंचे, लेकिन दोनों पक्षों के बीच घंटों चली खींचतान के बाद भी फिलहाल कोई ठोस समाधान नहीं निकल सका है।
स्थिति को संभालने के लिए पहुंचे कलेक्टर और कमिश्नर के साथ एसडीएम और टीआई भी मौके पर मौजूद थे। प्रशासन ने यह प्रयास किया था कि पीडि़त परिवार और प्रदर्शनकारी पास के ग्राम पंचायत भवन में आकर अधिकारियों से चर्चा करें। हालांकि पीडि़त परिवार ने अधिकारियों के इस प्रस्ताव को सिरे से ठुकरा दिया। परिवार और उनके समर्थकों का रवैया बेहद स्पष्ट था कि वे धरना स्थल छोडक़र एक इंच भी नहीं हिलेंगे। उन्होंने कड़े शब्दों में कहा जिसे भी हमसे बात करनी है, वह खुद चलकर धरना स्थल पर आए। हालांकि बाद में एसडीएम और टीआई की विशेष समझाइश के बाद गांव के दो लोगों ने पंचायत भवन जाकर कलेक्टर और कमिश्नर के समक्ष अपनी बात रखी, लेकिन इस बातचीत का भी कोई सकारात्मक नतीजा नहीं निकला।
प्रशासन के रुख से असंतुष्ट ग्रामीण, दी चेतावनी
प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि पिछले पांच दिनों से वे ठंड और खुले आसमान के नीचे बैठे हैं, लेकिन प्रशासन की ओर से अब तक उनकी मांगों पर कोई भी संतोषजनक जवाब या ठोस आश्वासन नहीं दिया गया है। इसी प्रशासनिक उदासीनता के कारण ग्रामीणों का गुस्सा फूट पड़ा है। आक्रोशित आदिवासियों ने अल्टीमेटम दिया है कि यदि उनकी मांगें जल्द नहीं मानी जाती हैं तो गुरुवार सुबह ठीक 8 बजे जिलेभर से 10 से 15 हजार लोग एकजुट होकर पैदल मार्च निकालेंगे। यह कारवां सीधे भोपाल की ओर कूच करेगा और मुख्यमंत्री आवास के सामने पहुंचकर अपनी बात रखेगा।
कमिश्नर बोले- तथ्यों की जांच के बाद बनेगी रिपोर्ट
मौके की नजाकत को भांपते हुए कमिश्नर ने स्पष्ट किया कि वे शासन के निर्देश पर ही इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच करने के लिए पहुंचे हैं। उन्होंने प्रभावित क्षेत्र का दौरा करने के साथ-साथ पीडि़त परिवारों और स्थानीय ग्रामीणों से आमने-सामने चर्चा की है। कमिश्नर ने बताया कि प्रशासन हर एक पहलू की बारीकी से जांच कर रहा है। इसमें मुख्य रूप से अतिक्रमण से जुड़े बिंदुओं को खंगाला जा रहा है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि संबंधित लोगों के पास रहने के लिए अन्य कोई वैकल्पिक जगह है या वे पूरी तरह इसी जमीन पर निर्भर हैं। उन्होंने आश्वासन दिया कि सभी पक्षों के तथ्यों की गहन समीक्षा के बाद एक विस्तृत रिपोर्ट शासन को भेजी जाएगी, जिसके आधार पर आगे की वैधानिक कार्रवाई तय होगी।



