कोसमी के आदिवासियों के समर्थन में कूदी ‘बाप’, भडक़े विधायक

सीहोर। मध्य प्रदेश की सियासत में एक बार फिर आदिवासियों का मुद्दा गरमा गया है। बुधनी विधानसभा क्षेत्र के कोसमी गांव में आदिवासियों के आशियानों पर चली प्रशासनिक कार्रवाई के खिलाफ, भारत आदिवासी पार्टी बाप से सैलाना विधायक कमलेश्वर डोडियार सीधे मैदान में उतर आए हैं। पीडि़त परिवारों के बीच पहुंचकर उन्होंने राज्य की मोहन यादव सरकार को आर-पार की लड़ाई का कड़ा अल्टीमेटम दिया है।
कोसमी गांव में पहुंचकर विधायक डोडियार ने प्रशासनिक कार्रवाई और सरकार के रवैये पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि जो आदिवासी परिवार पीढिय़ों से जमीन पर खेती कर अपना गुजर-बसर कर रहे थे, उनके घर उजाड़ दिए गए हैं। विधायक ने आरोप लगाया कि पूर्ववर्ती सरकारों ने लंबे समय तक राज किया लेकिन आदिवासियों को पट्टे नहीं दिए और अब वर्तमान मोहन सरकार आदिवासियों पर जुल्म की सारी हदें पार कर रही है। गरीबों की जमीनें किसी कीमत पर छिनने नहीं दी जाएंगी।
प्रशासन और सरकार पर लगाए गंभीर आरोप
विधायक कमलेश्वर डोडियार ने मौके पर पीडि़त लोगों से मुलाकात कर सरकार और स्थानीय प्रशासन पर कई गंभीर और सनसनीखेज आरोप लगाए। उनका कहना है कि कार्रवाई के नाम पर केवल मकान ही नहीं तोड़े गए, बल्कि बड़े पैमाने पर नुकसान पहुंचाया गया…
– खेतों में लहलहाती फसलें पूरी तरह रौंद दी गईं।
– आदिवासियों के जीने का एकमात्र सहारा बने पानी के पीने के स्रोतों को मलबे से पाट दिया गया।
– घरों में रखा खाने-पीने का राशन और जरूरी घरेलू सामान तहस-नहस कर दिया गया।
– विरोध करने वाले ग्रामीणों के मोबाइल छीन लिए गए, महिलाओं और बच्चों के साथ मारपीट की गई और उनके साथ जातीय दुव्र्यवहार तक किया गया।
आर-पार का ऐलान
इन तमाम ज्यादतियों के बाद विधायक डोडियार के तेवर पूरी तरह बगावती हो चुके हैं। उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा है कि आदिवासियों के जल, जंगल और जमीन की हिफाजत के लिए अब बीजेपी की मोहन सरकार से सीधा मुकाबला और संघर्ष होगा। डोडियार ने मांग की है कि गरीबों को उजाडऩा तुरंत बंद किया जाए। उन्हें बेदखल करने के बजाय वन अधिकार अधिनियम के तहत पट्टे दिए जाएं। साथ ही उनके इलाकों में बिजलीए सडक़ए पानी और स्कूल की पक्की व्यवस्था कर न्याय दिलाया जाए, अन्यथा यह संघर्ष और भी तेज किया जाएगा।



