इंदौर-देवास बायपास पर सफर हुआ आसान, एनएच-52 पर एमआर-10, रालामंडल और अर्जुन बड़ौद फ्लाईओवर शुरू, ब्लैकस्पॉट सुधारों से सडक़ सुरक्षा मजबूत

भोपाल। भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण द्वारा इंदौर-देवास बायपास एनएच-52 पर यातायात को सुगम बनाने और सडक़ सुरक्षा को मजबूत करने के लिए बड़े पैमाने पर विकास कार्य किए गए हैं। बायपास पर एमआर-10, रालामंडल, अर्जुन बड़ौद और राऊ सर्कल जैसे प्रमुख फ्लाईओवर शुरू होने से वाहन चालकों को ट्रैफिक जाम से बड़ी राहत मिली है। इसके साथ ही दुर्घटना संभावित क्षेत्रों ब्लैकस्पॉट में सुधार और रसूलपुर जंक्शन पर नए फ्लाईओवर के निर्माण से इस मार्ग पर सफर अब पहले से कहीं अधिक सुरक्षित और तेज हो गया है। आइए जानते हैं बायपास पर तैयार हुए इन प्रमुख प्रोजेक्ट्स का पूरा ब्योरा…
एमआर-10 जंक्शन फ्लाईओवर
लागत और लंबाई: लगभग 77 करोड़ रुपये की लागत से बना यह फ्लाईओवर करीब 1.8 किलोमीटर लंबा है। इसकी दोनों लेन 14 अक्टूबर 2026 को जनता के लिए खोल दी गईं।
फायदा: इस जंक्शन पर बायपास, शहर और सुपर कॉरिडोर की तरफ जाने वाले वाहनों का भारी दबाव रहता था। फ्लाईओवर शुरू होने से मुख्य मार्ग के वाहन स्थानीय ट्रैफिक से अलग हो गए हैं, जिससे गाडिय़ों की लंबी कतारें कम हुई हैं और यात्रियों का समय बच रहा है।
रालामंडल जंक्शन फ्लाईओवर
लागत और लंबाई: करीब 24 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित यह 980 मीटर लंबा छह-लेन फ्लाईओवर मई 2026 से पूरी तरह चालू है।
सडक़ सुरक्षा: इस क्षेत्र को एक बड़ा ब्लैकस्पॉट माना गया था। वर्ष 2023 से 2025 के बीच यहां हुई 10 दुर्घटनाओं में 11 लोगों की जान जा चुकी थी। अब फ्लाईओवर बनने से मुख्य बायपास का ट्रैफिक क्रॉस-ट्रैफिक से अलग हो गया है, जिससे हादसों की आशंका काफी हद तक कम हो गई है। साथ ही इंदौर से तिल्लौर, तिंछा और खंडवा रोड जाने वाले यात्रियों को बेहतरीन कनेक्टिविटी मिल रही है।
अर्जुन बड़ौद फ्लाईओवर
लागत और लंबाई: लगभग 37 करोड़ रुपये की लागत से बने 1 किलोमीटर लंबे इस फ्लाईओवर पर 11 मई 2026 से परीक्षण के बाद नियमित आवाजाही शुरू हुई।
फायदा: पहले यहां ट्रैफिक सर्विस रोड से गुजरता था, जिससे अक्सर जाम की स्थिति बनती थी। अब इंदौर-देवास के बीच आने-जाने वाले वाहन बिना रुके सीधे आगे निकल जाते हैं, जिससे सर्विस रोड पर दबाव घट गया है।
राऊ सर्कल फ्लाईओवर
लागत और लंबाई: करीब 30 करोड़ रुपये की लागत से तैयार 1 किलोमीटर लंबा छह-लेन फ्लाईओवर फरवरी 2026 में पूरी तरह खोल दिया गया।
फायदा: राऊ, पीथमपुर और खलघाट की ओर जाने वाले इस व्यस्त और दुर्घटना-संभावित जंक्शन पर फ्लाईओवर बनने से यातायात का संचालन बेहद व्यवस्थित और सुगम हो गया है।
रसूलपुर जंक्शन पर फ्लाईओवर का निर्माण तेजी से जारी
राष्ट्रीय राजमार्ग-52 पर स्थित एक अन्य दुर्घटना संभावित क्षेत्र रसूलपुर तिराहे पर सडक़ सुरक्षा को पुख्ता करने के लिए काम जोर-शोर से चल रहा है।
लागत और रूपरेखा: लगभग 31.18 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाला यह छह-लेन फ्लाईओवर करीब 1.133 किलोमीटर लंबा होगा।
सुविधाएं: इसमें व्हीकुलर अंडरपास एप्रोच रोड और सर्विस/स्लिप रोड का प्रावधान किया गया है, जिससे स्थानीय और मुख्य मार्ग का ट्रैफिक बिना किसी बाधा के निकल सकेगा।
ब्लैकस्पॉट सुधारों से हादसों पर लगाम
एनएचएआई द्वारा इंदौर क्षेत्र में लगातार एक्सीडेंटल जोन की पहचान कर सुधारात्मक कदम उठाए जा रहे हैं। इंजीनियरिंग में सुधार और फ्लाईओवर जैसी संरचनाओं के विकास का मुख्य उद्देश्य गाडिय़ों का निर्बाध आवागमन सुनिश्चित करना और सडक़ दुर्घटनाओं के जोखिम को न्यूनतम करना है। आने वाले समय में कुछ अन्य ब्लैकस्पॉट सुधार परियोजनाओं पर भी जल्द काम शुरू किया जाएगा, ताकि यात्रियों को पूरी तरह सुरक्षित सपुर मिल सके।



