मध्यप्रदेश

भोपाल के आकाश को छुएगा शिवार्चना केंद्र, धौलपुर के पत्थरों से तराशा जाएगा 150 फीट ऊंचा वैभव

भोपाल। राजधानी भोपाल की वास्तुकला में अब राजस्थान की नक्काशी और प्राचीन भारतीय स्थापत्य कला का अद्भुत संगम देखने को मिलेगा। करुणाधाम आश्रम में 150 फीट ऊंचे भव्य शिवालय का भूमि पूजन संपन्न हुआ। करीब 55 हजार वर्गफुट में फैलने वाला यह मंदिर अपनी भव्यता और धौलपुर पत्थरों की मजबूती के साथ शहर का नया लैंडमार्क बनने की ओर अग्रसर है।
प्रस्तावित मंदिर की सबसे बड़ी विशेषता इसका विशाल शिखर होगा, जिसकी ऊंचाई 150 फीट निर्धारित की गई है। गुरुदेव श्री शांडिल्य महाराज ने बताया कि इस मंदिर का निर्माण राजस्थान के प्रसिद्ध धौलपुर पत्थरों से किया जाएगा। ये पत्थर न केवल अपनी मजबूती के लिए प्रसिद्ध हैं, बल्कि मंदिर को एक प्राचीन और भव्य भारतीय स्थापत्य शैली का स्वरूप भी प्रदान करेंगे। करीब 55 हजार वर्गफुट क्षेत्र में फैलने वाला यह परिसर वास्तुकला का एक अद्भुत नमूना होगा।
आस्था के साथ आधुनिक सुविधाओं का मेल
शिवार्चना केंद्र को केवल एक मंदिर के रूप में नहीं, बल्कि एक समग्र आध्यात्मिक केंद्र के रूप में विकसित किया जा रहा है। इस भव्य परियोजना की कुल लागत लगभग 22 करोड़ रुपये आंकी गई है। निर्माण कार्य को पूर्ण करने के लिए 4 वर्ष का लक्ष्य रखा गया है। श्रद्धालुओं के मानसिक शांति के लिए परिसर में एक विशेष ध्यान कक्ष (मेडिटेशन हॉल) बनाया जाएगा। साथ ही एक समृद्ध पुस्तकालय का निर्माण भी होगा, जहां धार्मिक ग्रंथों के साथ-साथ ज्ञानवर्धक पुस्तकों का संग्रह होगा। मंदिर परिसर में हरियाली, आकर्षक फाउण्टेन और सुंदर पार्कों का निर्माण किया जाएगा, ताकि यहां आने वाले श्रद्धालुओं को सकारात्मक और शांत वातावरण मिल सके। श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या को देखते हुए यातायात और भीड़ नियंत्रण के लिए बेसमेंट पार्किंग की विशेष व्यवस्था की गई है।
सांस्कृतिक विकास का नया आयाम
भूमि पूजन के अवसर पर गुरुदेव ने कहा कि यह परिकल्पना धार्मिक आस्था को सशक्त बनाने के साथ-साथ हमारी सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत को अगली पीढ़ी तक पहुंचाने का एक प्रयास है। यह केंद्र आने वाले समय में योग, ध्यान और ज्ञान का प्रमुख केंद्र बनेगा। इस अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे, जिन्होंने इस पुनीत कार्य की शुरुआत पर हर्ष व्यक्त किया। राजधानी वासियों के लिए यह शिवालय आने वाले समय में पर्यटन और श्रद्धा का एक बड़ा केंद्र बनकर उभरेगा।

 

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