ओबीसी आरक्षण के मुद्दे पर सपा का हल्ला बोल, कल प्रदेशभर में प्रदर्शन, आबादी के अनुपात में हक की मांग

भोपाल। मध्य प्रदेश में ओबीसी आरक्षण के मुद्दे को लेकर राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है। समाजवादी पार्टी गुरुवार को प्रदेश के अलग-अलग जिलों में प्रदर्शन करने जा रही है। पार्टी कार्यकर्ता कलेक्ट्रेट पहुंचकर ज्ञापन सौंपेंगे और सरकार से ओबीसी को उनकी आबादी के अनुपात में आरक्षण देने के साथ-साथ इसे संविधान की नौवीं अनुसूची में शामिल करने की पुरजोर मांग उठाएंगे।
समाजवादी पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. मनोज यादव ने भारतीय जनता पार्टी पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि भाजपा हमेशा पिछड़ा वर्ग के नाम पर राजनीति करती है और उनके ही समर्थन से सत्ता हासिल करती हैए लेकिन जब अधिकार देने की बारी आती हैए तो वह पीछे हट जाती है। उन्होंने कहा कि मध्य प्रदेश में लंबे समय से भाजपा की सरकार है। उमा भारती, बाबूलाल गौर और शिवराज सिंह चौहान के बाद अब डॉ. मोहन यादव मुख्यमंत्री हैं, लेकिन ओबीसी आरक्षण का गंभीर मुद्दा आज भी जस का तस लंबित पड़ा है।
बड़े-बड़े वादों पर उठे सवाल
डॉ. यादव ने आरोप लगाया कि पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और मौजूदा मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने ओबीसी को 27 प्रतिशत आरक्षण दिलाने के बड़े-बड़े दावे और वादे किए थे। मंचों से यहां तक कहा गया था कि कोई माई का लाल आरक्षण नहीं रोक सकता, लेकिन धरातल पर पिछड़ा वर्ग आज भी अपने वाजिब हक से महरूम है।
उन्होंने समाजवादी विचारक डॉ. राममनोहर लोहिया के प्रसिद्ध सिद्धांत जिसकी जितनी संख्या, उसकी उतनी भागीदारी का हवाला देते हुए कहा कि मध्य प्रदेश में ओबीसी की आबादी 52 प्रतिशत से अधिक हैए इसलिए उन्हें इसी अनुपात में आरक्षण मिलना चाहिए। ईडब्ल्यूएस के तहत 10 प्रतिशत आरक्षण का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि पिछड़ा वर्ग पूरी तरह सामाजिक न्याय में विश्वास रखता है और अपने संवैधानिक अधिकारों की मांग कर रहा है।
सपा की प्रमुख मांगें
– ओबीसी वर्ग को उनकी जनसंख्या 52 प्रतिशत से अधिक के अनुपात में आरक्षण दिया जाए।
– राज्य सरकार केंद्र सरकार से सिफारिश कर इस आरक्षण के प्रावधानों को संविधान की नौवीं अनुसूची में डलवाए, ताकि कानूनी अड़चनों से बचाया जा सके।
– मुख्यमंत्री द्वारा सर्वदलीय बैठकों में किए गए वादों को धरातल पर उतारा जाए।
– केवल सरकारी नौकरियों तक ही सीमित न रहकर, निजी क्षेत्र में भी ओबीसी के लिए आरक्षण और प्रतिनिधित्व की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।
– सपा ने आरोप लगाया कि सरकार द्वारा कोर्ट में मजबूत और पुख्ता आंकड़े पेश न किए जाने के कारण ही मामला अटका है, जिसे अब प्रभावी तरीके से सुलझाया जाना चाहिए।



