कम वर्षा पर सीएम मोहन यादव सख्त, बोले- रोजगार और विकास के खजाने में कमी नहीं आने देंगे

भोपाल। प्रदेश में कम वर्षा से उत्पन्न परिस्थितियों को लेकर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सख्त रुख अपनाया है। मुख्यमंत्री ने पांढुर्णा में वरिष्ठ अधिकारियों के साथ एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक की और जिले में वर्षा व जल उपलब्धता की वर्तमान स्थिति का जायजा लिया। बैठक के दौरान उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि वे कम वर्षा के संभावित प्रभावों का सटीक आकलन करें और प्रभावित किसानों व आमजन को तुरंत हरसंभव सहायता उपलब्ध कराएं।
मुख्यमंत्री ने आश्वस्त किया कि कम बारिश जैसी चुनौतियों के बावजूद राज्य में रोजगार और विकास कार्यों की गति धीमी नहीं होगी और इसके लिए सरकार के पास बजट की कोई कमी नहीं है।
पांढुर्णा के विकास के लिए सरकार प्रतिबद्ध
समीक्षा बैठक के दौरान मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि पांढुर्णा मध्य प्रदेश का 55वां जिला है। वर्ष 2023 में नए जिले के रूप में अस्तित्व में आने के बाद से ही राज्य सरकार यहां अधोसंरचनात्मक विकास के लिए पर्याप्त धनराशि उपलब्ध करा रही है। नए जिला कार्यालयों की स्थापना और आवश्यक प्रशासनिक पदों की स्वीकृति तेजी से दी जा रही है।सीएम ने कलेक्टर और कमिश्नर को स्थिति पर लगातार नजर रखने और आवश्यकता के अनुरूप त्वरित कदम उठाने के निर्देश दिए हैं।
मप्र को नंबर.1 दुग्ध उत्पादक राज्य बनाने का संकल्प
किसानों की आय बढ़ाने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती देने के लिए मुख्यमंत्री ने कृषि के साथ-साथ सहायक क्षेत्रों पर विशेष जोर दिया। सीएम ने बताया कि मध्य प्रदेश वर्तमान में देश में तीसरे स्थान पर दुग्ध उत्पादन कर रहा है। सरकार का लक्ष्य एमपी को देश का नंबर-1 दुग्ध उत्पादक राज्य बनाना है।
फूड इंडस्ट्री और डेयरी सेक्टर को बढ़ावा
भविष्य की जरूरतों को देखते हुए राज्य में फूड इंडस्ट्री, मिल्क प्रोसेसिंग दूध प्रसंस्करण और सहकारी दुग्ध समितियों के विस्तार पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।
रोजगारपरक पाठ्यक्रम
युवाओं को स्थानीय स्तर पर रोजगार से जोडऩे के लिए रोजगारपरक पाठ्यक्रमों को बढ़ावा दिया जाएगा, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में स्वरोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।
किसानों की आय बढ़ाना सरकार की प्राथमिकता
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि कम वर्षा से पैदा हुई चुनौतियों से निपटना और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को संभालना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। पशुपालन और दुग्ध प्रसंस्करण जैसे उद्योगों को प्रोत्साहन मिलने से किसानों की केवल खेती पर निर्भरता कम होगी और उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत होगी।



