एएसपी की पुलिस पंचायत में सहजता से निपटे उलझे हुए मामले…

सीहोर। बुजुर्गों की समस्याओं और पारिवारिक-सामाजिक विवादों को कोर्ट-कचहरी के चक्करों से बचाकर आपसी सहमति से सुलझाने के उद्देश्य से सीहोर पुलिस द्वारा एक सराहनीय पहल की गई है। पुलिस अधीक्षक सोनाक्षी सक्सेना के निर्देश पर आयोजित सीनियर सिटीजन पुलिस पंचायत की बैठक में कई जटिल और उलझे हुए मामलों का बेहद सहजता से निराकरण किया गया।
अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक डॉ. प्रशांत चौबे और कोर कमेटी सदस्य कमल सिंह ठाकुर व विपुल चाण्डक की उपस्थिति में आयोजित इस बैठक में बुजुर्गों की शिकायतों को गंभीरता से सुना गया। एएसपी और पंचायत सदस्यों ने समझाइश, व्यावहारिक समाधान और मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए वर्षों से चले आ रहे विवादों में दोनों पक्षों की सहमति से राजीनामा करवाया।
1. कमर्शियल चक्की के शोर व वाइब्रेशन से राहत
शहर की एक व्यस्त कॉलोनी की निवासी बुजुर्ग महिला हार्ट पेशेंट ने शिकायत की थी कि पड़ोसी के घर में दिनभर चलने वाली फ्लोर मिल चक्की के शोर और वाइब्रेशन से उनका स्वास्थ्य बिगड़ रहा है। दूसरी ओर अनावेदक ने इसे अपना एकमात्र पारिवारिक रोजगार बताया। एएसपी और पंचायत ने व्यवस्था दी कि शांति से जीने का अधिकार सर्वोपरि है, लेकिन रोजगार भी जरूरी है। सहमति से तय हुआ कि दोपहर 1.00 से 4.00 बजे तक महिला के विश्राम और दवा के समय चक्की पूरी तरह बंद रहेगी। बाकी समय में अनावेदक जीरो न्यूसेंस के लिए ध्वनि और कंपन नियंत्रण के उपाय करेगा। एक माह बाद इसकी समीक्षा की जाएगी।
2. बुजुर्ग महिला और पड़ोसी का रास्ता विवाद
थाना गोपालपुर क्षेत्र की एक असहाय बुजुर्ग महिला ने पड़ोसी द्वारा विवाद, मारपीट और धमकी दिए जाने की शिकायत की थी। सुनवाई में पता चला कि खेत के रास्ते पर पत्थर रखने को लेकर विवाद था। पंचायत ने कड़ा रुख अपनाते हुए भविष्य में किसी भी प्रकार की धमकी या विवाद न करने की सख्त समझाइश दी। साथ ही गांव के पटेल को पंचों के साथ मौके पर जाकर रास्ते का स्थाई समाधान निकालने का निर्देश दिया।
3. रिटायर्ड अधिकारी की जमीन पर कब्जे का मामला
एक रिटायर्ड अधिकारी की जमीन पर उनके ही सगे भाई (वे भी सेवानिवृत्त) ने पक्का निर्माण कर लिया था। विधिक रूप से जमीन आवेदक की होने के कारण पंचायत ने स्पष्ट किया कि निस्तारण आवेदक की इच्छा अनुसार ही होगा। भाइयों के रिश्ते और नैतिकता को ध्यान में रखते हुए एएसपी की समझाइश पर दोनों पक्ष क्षतिपूर्ति के आधार पर आपसी सहमति से मामला सुलझाने को तैयार हुए।
4. दुकान और एग्रीमेंट का पेचीदा विवाद
एक बुजुर्ग आवेदक ने अपनी दुकान खाली न किए जाने की शिकायत दर्ज कराई थी। अनावेदक का तर्क था कि उसने पूर्व में एग्रीमेंट के तहत राशि दी थी, लेकिन पट्टे की जमीन होने के कारण रजिस्ट्री नहीं हो सकी। पंचायत ने ब्याज और किराये का हिसाब जोडक़र व्यावहारिक फार्मूला तय किया। तय हुआ कि आवेदक द्वारा निर्धारित मूल राशि और शेष हिसाब चुकता करते ही अनावेदक कब्जा छोड़ देगा।
बैठक में अन्य कई छोटे-बड़े मामलों में भी उभय पक्षों को बैठाकर सौहार्दपूर्ण माहौल में समझौते कराए गए। एएसपी की इस संवेदनशील और व्यावहारिक कार्यशैली से बुजुर्गों को थाने और अदालतों के चक्कर लगाने से मुक्ति मिली, जिसके लिए उपस्थित नागरिकों ने पुलिस प्रशासन का आभार व्यक्त किया।



