सुशासन कॉन्क्लेव में बोले सीएम डॉ. मोहन यादव, खेती से युवाओं के दूर होने पर जताई चिंता

भोपाल। राजधानी भोपाल के कुशाभाऊ ठाकरे अंतरराष्ट्रीय कन्वेंशन सेंटर में सोमवार को कंट्रीब्यूशन ऑफ सेंट्रली फंडेड इंस्टीट्यूशंस फॉर समृद्ध मध्यप्रदेश.2047 विषय पर राज्य स्तरीय कॉन्क्लेव आयोजित किया गया। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि आने वाले समय में कौशल स्किल और नवाचार ही प्रदेश की अर्थव्यवस्था की दिशा तय करेंगे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि जब स्किल नई करेंसी है और इनोवेशन नई इकोनॉमीश्, तब प्रदेश के सभी शिक्षण व शोध संस्थानों को कौशल, रिसर्च और उद्यमिता के प्रमुख केंद्र के रूप में विकसित करना होगा।
सेमीकंडक्टर यूनिट बदलते मप्र की पहचान
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने प्रदेश के विकास का उदाहरण देते हुए कहा कि मध्य प्रदेश में सेमीकंडक्टर बनाने वाली यूनिट का आना बदलते राज्य की एक नई तस्वीर है। दो-तीन साल पहले तक इसकी कल्पना करना भी मुश्किल था। उन्होंने कहा कि तकनीक के साथ बदलती दुनिया में प्रदेश के संस्थानों को भी अपनी भूमिका में बदलाव लाना होगा और भविष्य की जरूरतों के हिसाब से युवाओं को तैयार करना होगा।
खेती से दूर होती नई पीढ़ी पर जताई चिंता
अपने संबोधन के दौरान मुख्यमंत्री ने एक बड़ी सामाजिक व आर्थिक चुनौती की ओर ध्यान आकर्षित किया। उन्होंने कहा कि स्कूल-कॉलेज के कार्यक्रमों में जाने पर पता चलता है कि 99 प्रतिशत युवा कृषि से जुड़े परिवारों से आते हैं, लेकिन जब उनसे पूछा जाता है कि कौन खेती करना चाहता है तो कोई हाथ नहीं उठाता। सीएम ने कहा कि यह चुनौती हमें घर से ही मिल रही है। इसलिए खेती को आधुनिक तकनीक, नवाचार और कौशल से जोडऩा होगाए ताकि युवा कृषि को भी एक बेहतर रोजगार और उद्यम के रूप में देखें।
एआई से ज्यादा जरूरी मानव पूंजी
कार्यक्रम में मुख्य सचिव अशोक बर्णवाल ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस एक बड़ा बदलाव लाने वाला है, लेकिन इसके सटीक प्रभाव का आकलन करना अभी मुश्किल है। इसलिए तकनीक के साथ-साथ राज्य को अपनी मानव पूंजी को मजबूत करने पर ध्यान देना होगा। उन्होंने कहा कि हमें केवल संस्थान या इमारतें खड़ी नहीं करनी हैं, बल्कि शिक्षा और स्वास्थ्य में लर्निंग और हेल्थ आउटकम पर फोकस करना होगा।
130 संस्थान मिलकर तैयार करेंगे समाधान
इस कॉन्क्लेव में आईआईटी इंदौर, आईआईएम इंदौर, आईआईएसईआर भोपाल, एम्स भोपाल, मैनिट, डीआरडीओ और इसरो जैसे 59 केंद्रीय संस्थानों समेत कुल 130 से अधिक सरकारी व निजी संस्थान शामिल हुए। वन इंस्टीट्यूट-वन प्रॉमिस की अवधारणा पर काम करते हुए ये संस्थान कृषि, स्वास्थ्य, उद्योग और तकनीक के क्षेत्र में राज्य सरकार की समस्याओं का व्यावहारिक समाधान सुझाएंगे।
वर्ष 2047 के विकसित मध्य प्रदेश के लक्ष्य को हासिल करने के लिए 2029 को पहला चेकपॉइंट मानकर रणनीति बनाई जाएगी। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री की उपस्थिति में अटल बिहारी वाजपेयी सुशासन संस्थान और केंद्रीय संस्थानों के बीच एमओयू का आदान-प्रदान भी हुआ।



