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केन्द्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह का बड़ा एक्शन…

भोपाल। किसानों की समस्याओं को लेकर सदैव संवेदनशील रहने वाले केन्द्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने एक बार फिर कड़ा रुख अपनाया है। खरगोन और धार जिले के किसानों की शिकायत पर त्वरित संज्ञान लेते हुए उन्होंने हैदराबाद की एक निजी बीज कंपनी के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने और करेले की एक विशेष किस्म के बीज पर तत्काल प्रतिबंध लगाने के निर्देश दिए हैं।
बता दें मध्य प्रदेश के खरगोन और धार जिले के बड़ी संख्या में पीडि़त किसान दिल्ली स्थित कृषि मंत्रालय पहुंचे थे। किसानों ने केन्द्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान से मुलाकात कर अपनी व्यथा सुनाई। किसानों ने बताया कि उन्होंने हैदराबाद की नूनहेन्स इंडिया कंपनी से करेले के बीज खरीदे थे। किसानों का आरोप है कि कंपनी ने उन्हें रूबास्टा किस्म के अमानक और घटिया बीज थमा दिए, जिसके कारण उनकी मेहनत पर पानी फिर गया।
90 प्रतिशत फसल हुई बर्बाद
मुलाकात के दौरान किसानों ने बताया कि अमानक बीज बोने के कारण खेतों में लगी 90 प्रतिशत फसल खराब हो गई है। इससे न केवल किसानों की लागत डूब गई, बल्कि उन्हें भारी आर्थिक नुकसान का सामना करना पड़ रहा है। किसानों की आंखों में आंसू और बर्बादी की कहानी सुनकर कृषि मंत्री ने तत्काल कड़े कदम उठाने का फैसला लिया।
कंपनी पर हो एफआईआर और बीज पर बैन
शिवराज सिंह चौहान ने मामले की गंभीरता को देखते हुए संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया कि नूनहेन्स इंडिया कंपनी के खिलाफ तत्काल एफआईआर दर्ज की जाए। करेले की अमानक रूबास्टा किस्म के बीजों की बिक्री पर तुरंत प्रतिबंध लगाया जाए। किसानों को हुए नुकसान का आकलन कर राहत सुनिश्चित करने की दिशा में काम किया जाए।
पेस्टिसाइड माफिया को चेतावनी
इस अवसर पर केन्द्रीय मंत्री ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि मोदी सरकार किसानों के हितों से समझौता कतई बर्दाश्त नहीं करेगी। उन्होंने देशभर में अमानक बीज और नकली कीटनाशक बनाने वाली कंपनियों को चेतावनी देते हुए कहा कि ऐसी जालसाज कंपनियों पर निरंतर कड़ी कार्रवाई जारी रहेगी। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि बीज और खाद की गुणवत्ता की नियमित जांच की जाए ताकि भविष्य में किसी भी किसान को इस तरह के संकट का सामना न करना पड़े।
किसानों ने जताया आभार
कृषि मंत्री की इस त्वरित और सख्त कार्रवाई से खरगोन और धार के किसानों में संतोष की लहर है। किसानों का कहना है कि बीज माफियाओं के खिलाफ इस तरह की कार्रवाई से अन्य कंपनियों को भी कड़ा संदेश जाएगा और किसानों का शोषण रुकेगा।

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