जय माता दी के स्वर से गूंजी सलकनपुर की पहाड़ी…

सीहोर। शारदीय नवरात्रि के पावन पर्व की शुरुआत के साथ ही मध्य प्रदेश के प्रसिद्ध शक्तिपीठ सलकनपुर स्थित मां विजयासन देवी धाम में चारों तरफ भक्तिमय माहौल बन गया है। आज रविवार और नवरात्रि के पहले दिन सुबह से ही जय माता दी के जयकारों से सलकनपुर की पूरी पहाड़ी गूंज उठी है। विंध्य पर्वत पर स्थित इस पावन धाम में माता के दर्शनों के लिए श्रद्धालुओं का ऐसा तांता लगा है कि पूरा क्षेत्र आस्था के समंदर में डूब गया है।
नवरात्रि के पहले दिन आज घरों और मंदिरों में घटस्थापना के साथ आदिशक्ति मां दुर्गा के प्रथम स्वरूप मां शैलपुत्री की विधि विधान से पूजा अर्चना की जा रही है। सलकनपुर के इस ऐतिहासिक मंदिर में भी सुबह से ही विशेष अनुष्ठान, हवन और पूजन का दौर चल रहा है। सीढ़ी मार्ग से लेकर मुख्य मंदिर परिसर तक सिर्फ भक्तों के आने-जाने और माता के जयकारों की गूंज सुनाई दे रही है। दूर-दूर से पहुंचे श्रद्धालु कतारों में लगकर माता के दर्शन कर रहे हैं और अपने परिवार की सुख, शांति व समृद्धि की कामना कर रहे हैं।
प्रशासन की चाक-चौबंद व्यवस्था और सुरक्षा
नौ दिनों तक चलने वाले इस महाउत्सव में उमडऩे वाली भारी भीड़ को देखते हुए जिला प्रशासन और मंदिर ट्रस्ट ने सुरक्षा और सुविधाओं के कड़े इंतजाम किए हैं। मंदिर परिसर, सीढ़ी मार्ग, पार्किंग और मुख्य रास्तों पर सुरक्षा की दृष्टि से भारी पुलिस बल तैनात किया गया है। भीड़ को नियंत्रित करने के लिए विशेष बैरिकेडिंग की गई है, ताकि भक्त बिना किसी परेशानी के कतारबद्ध होकर माता के दर्शन कर सकें।
रोपवे और सीढिय़ों की सुविधा
बुजुर्ग, बीमार और दिव्यांग श्रद्धालुओं के लिए रोपवे की सुविधा लगातार चालू है। इसके अलावा आम श्रद्धालु सडक़ मार्ग और सीढिय़ों के रास्ते भी माता के दरबार में हाजिरी लगा रहे हैं। प्रशासन रात तक बढऩे वाली भीड़ को लेकर पूरी तरह सतर्क है।
नौ दिनों तक रहेगा मेले जैसा भव्य माहौल
सीहोर जिला मुख्यालय से लगभग 80 से 100 किलोमीटर दूर स्थित सलकनपुर धाम में यूं तो साल भर भक्तों का आना-जाना लगा रहता है, लेकिन शारदीय और चैत्र नवरात्रि के इन पवित्र दिनों में इस पूरे क्षेत्र का स्वरूप ही बदल जाता है। अगले नौ दिनों तक यहां मेला जैसा भव्य माहौल रहेगा, जहां मध्य प्रदेश के अलावा देश के अन्य राज्यों से भी लाखों की संख्या में श्रद्धालु अपनी मन्नतें लेकर माता के दरबार में पहुंचेंगे।



