विकास या आदिवासियों पर अत्याचार, केन-बेतवा प्रोजेक्ट पर भडक़े जीतू पटवारी, सरकार को घेरा

भोपाल। छतरपुर और पन्ना जिले में केन-बेतवा लिंक, मझगांव और रूंझ परियोजनाओं के नाम पर बेदखल किए जा रहे आदिवासी और स्थानीय परिवारों के मुद्दे पर प्रदेश की राजनीति पूरी तरह गरमा गई है। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने सरकार की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाते हुए सीधा हमला बोला है। पटवारी ने आरोप लगाया कि एक तरफ विकास के बड़े-बड़े दावे किए जा रहे हैं तो दूसरी तरफ अपने हक, उचित मुआवजे और सुरक्षित भविष्य की मांग कर रहे निहत्थे आदिवासियों पर लाठियां बरसाई जा रही हैं।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक के बाद एक कई तीखे सवाल दागते हुए राज्य सरकार की मंशा पर सवाल उठाए। उन्होंने लिखा कि केन-बेतवा और मझगांव जैसी बड़ी परियोजनाओं से प्रभावित परिवार दर-दर भटकने को मजबूर हैं। प्रभावित लोग शांतिपूर्ण ढंग से अपना हक मांग रहे हैं, लेकिन सरकार उनकी जायज मांगों को सुनने और समाधान निकालने के बजाय सच और न्याय की आवाज को दबाने में जुटी हुई है।
जमीन छीनी जा रही, हक मांगने पर पुलिस से पिटवा रहे
जीतू पटवारी ने तंज कसते हुए कहा कि विकास की आड़ में आदिवासियों के घर और जमीनें छीनी जा रही हैं। उनके आशियाने उजड़ रहे हैं, लेकिन उन्हें न्याय देने के बजाय पुलिस हिरासत, लाठियां और दमन का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने सवाल उठाया कि विकास के नाम पर आदिवासियों को बेघर करना और हक मांगने पर पुलिस से पिटवाना, क्या यही बीजेपी सरकार का असली आदिवासी न्याय है।
अस्तित्व की लड़ाई लड़ रहे प्रभावित परिवार
उल्लेखनीय है कि केन-बेतवा लिंक परियोजना सहित अन्य बांध व जल परियोजनाओं के कारण छतरपुर और पन्ना के दर्जनों गांवों के हजारों आदिवासी और ग्रामीण विस्थापन की कगार पर हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि उन्हें न तो नियमानुसार विस्थापन का उचित मुआवजा दिया गया है और ना ही पुनर्वास की कोई ठोस व्यवस्था की गई है।
अपने ही घर-आंगन से बेदखल हो रहे ये परिवार अब अपने अस्तित्व और अधिकारों की लड़ाई लड़ रहे हैं। पटवारी के इस कड़े हमले के बाद अब देखना यह होगा कि राज्य सरकार और स्थानीय प्रशासन इस पर क्या रुख अपनाता है और प्रभावित आदिवासियों को उनका वाजिब हक कब तक मिल पाता है।



