पोर्टल और भाषण नहीं, खेत में खाद चाहिए…. जीतू पटवारी ने सीएम मोहन यादव को लिखा पत्र, रखीं 6 बड़ी मांगें

भोपाल। मध्य प्रदेश में रबी की फसलों की बुवाई के एन वक्त पर किसानों को हो रही खाद (यूरिया, डीएपी और एनपीके) की किल्लत को लेकर कांग्रेस ने राज्य सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। मध्य प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष जीतू पटवारी ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को एक पत्र लिखकर खाद संकट पर कड़ा ऐतराज जताया है। पटवारी ने कहा कि प्रदेश के किसानों को इस समय भाषण, झूठे आश्वासन और पोर्टल के फेर की नहीं, बल्कि अपने खेत तक पहुंचने वाली खाद की सख्त जरूरत है।
जीतू पटवारी ने पत्र में लिखा कि सीहोर, राजगढ़, भोपाल, विदिशा, सागर और छिंदवाड़ा जैसे जिलों से खाद वितरण में भारी गड़बड़ी, लंबी कतारों और ई-टोकन की तकनीकी बाधाओं की शिकायतें आ रही हैं।
उन्होंने सरकार के आंकड़ों पर सवाल उठाते हुए कहा कि सरकार प्रदेश में 11.50 लाख टन खाद और 2 लाख टन डीएपी का स्टॉक उपलब्ध होने का दावा कर रही है, लेकिन जमीनी तस्वीर यह है कि बैरसिया का किसान 60 किलोमीटर दूर सीहोर तक चक्कर काटने को मजबूर है। किसान सुबह 6 बजे से लाइन में खड़ा है, सर्वर ठप होने और ओटीपी न आने से परेशान हो रहा है।
100 से 200 की ओवररेटिंग और कालाबाजारी का आरोप
पटवारी ने आरोप लगाया कि सरकारी सोसायटियों और केंद्रों पर तकनीकी खामियों की वजह से किसान भटक रहे हैं, जिसका फायदा निजी विक्रेता उठा रहे हैं। निजी दुकानों पर किसानों से प्रति बोरी 100 से 200 रुपये तक अतिरिक्त वसूले जा रहे हैं।
सरकारी गोदामों में खाद होना और खेत तक पहुंचना, दो अलग बातें
कांग्रेस अध्यक्ष ने सरकार की कार्यप्रणाली पर तंज कसते हुए कहा कि सरकारी गोदाम में खाद का होना और किसान के खेत तक खाद का पहुंचना दो अलग-अलग बातें हैं। आज यही अंतर मध्य प्रदेश सरकार की सबसे बड़ी नाकामी बन चुका है। किसान को खेती छोडक़र सरकारी व्यवस्था के चक्कर काटने पड़ रहे हैं, जो सुशासन नहीं बल्कि सरकारी सिस्टम की सजा है।
उन्होंने मुख्यमंत्री से सवाल किया कि आपकी सरकार यह तय करे कि खाद का हिसाब सिर्फ कागजों और पोर्टल पर ही पूरा रहेगा या किसान के खेतों में भी इसका असर दिखाई देगा।



