काम न करने वाले अफसर-कर्मचारी 3 साल से पहले भी हटेंगे, 1 से 15 जून तक खुलेंगे ट्रांसफर

भोपाल। मध्य प्रदेश सरकार ने कैबिनेट की मंजूरी के बाद तबादला नीति.2026 जारी कर दी है। नई नीति के तहत राज्य में 1 जून से 15 जून तक तबादले किए जा सकेंगे। इस बार सरकार ने बड़ा प्रशासनिक बदलाव करते हुए प्रावधान किया है कि वित्तीय वर्ष के तय लक्ष्य पूरे नहीं करने वाले अधिकारी-कर्मचारियों को 3 साल की अवधि पूरी होने से पहले भी प्राथमिकता के आधार पर हटाया जा सकेगा।
नीति में अविवाहित, विधवा, तलाकशुदा और परित्यक्ता महिला कर्मचारियों को उनके गृह जिले में पदस्थ करने का प्रावधान है। वहीं जिन कर्मचारियों की सेवानिवृत्ति में एक वर्ष या उससे कम का समय बचा है, उनका सामान्य परिस्थितियों में तबादला नहीं किया जाएगा। कैंसर, डायलिसिस और ओपन हार्ट सर्जरी जैसी गंभीर बीमारियों से पीडि़त कर्मचारियों और 40 प्रतिशत से अधिक दिव्यांगों को भी ट्रांसफर से बड़ी राहत दी गई है। मान्यता प्राप्त कर्मचारी संगठनों के पदाधिकारियों को 4 वर्ष तक तबादले से छूट मिलेगी।
पारदर्शिता के लिए कड़े नियम
ऑनलाइन आदेश: सभी ट्रांसफर आदेश ऑनलाइन जारी होंगे। 15 जून के बाद ई-ऑफिस से जारी आदेश स्वत: शून्य माने जाएंगे। आदेशों में ट्रेजरी एम्पलाई कोड दर्ज करना अनिवार्य होगा।
वेतन पर रोक: ट्रांसफर के बाद पुराने स्थान से वेतन आहरण बंद हो जाएगा, ऐसा न होने पर इसे वित्तीय अनियमितता माना जाएगा।
दागियों पर बैन: जिन अधिकारियों के खिलाफ आपराधिक मामले या विभागीय जांच लंबित है, उन्हें कार्यपालिक पदों पर पोस्टिंग नहीं मिलेगी।
तबादलों की मंजूरी की प्रक्रिया
जिला संवर्ग और राज्य संवर्ग के तृतीय व चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों के जिले के भीतर तबादले कलेक्टर के माध्यम से प्रभारी मंत्री की मंजूरी से होंगे। प्रथम श्रेणी अधिकारियों के ट्रांसफर मुख्यमंत्री की मंजूरी से जारी किए जाएंगे।वहींए पुलिस विभाग में डीएसपी से नीचे के पदों पर फैसला पुलिस स्थापना बोर्ड करेगा।



