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ब्लैकलिस्टेड वेयरहाउस में मिला सरकारी गेहूं…

सीहोर। जिले में इस साल हुए रिकॉर्ड गेहूं उपार्जन के बीच अधिकारियों और वेयरहाउस मालिकों के बीच सांठगांठ का एक बड़ा खेल उजागर हुआ है। अहमदपुर क्षेत्र के वनखेड़ी गांव में एक रसूखदार संचालक के ब्लैकलिस्टेड वेयरहाउस में भारी मात्रा में सरकारी गेहूं जमा मिला। हद तो तब हो गई जब कार्रवाई से बचने के लिए इस गेहूं को गुपचुप तरीके से दूसरे वेयरहाउस में शिफ्ट किया जा रहा था। ग्रामीणों की सतर्कता और कलेक्टर की सख्ती के बाद इस पूरे गोलमाल का भंडाफोड़ हुआ है। फिलहाल वेयरहाउस को सील कर दिया गया है और मामले की विस्तृत जांच के आदेश दिए गए हैं।
जानकारी के अनुसार वनखेड़ी स्थित बद्रीनाथ वेयरहाउस को प्रशासन और कलेक्टर पहले ही अनियमितताओं के चलते ब्लैकलिस्टेड (काली सूची में डालना) कर चुके थे। नियम के मुताबिक इस गोदाम में सरकारी अनाज का भंडारण नहीं किया जा सकता था। इसके बावजूद रसूख के दम पर इस वेयरहाउस में समर्थन मूल्य पर खरीदा गया भारी मात्रा में गेहूं लाकर डंप कर दिया गया।
मामला तब खुला जब वेयरहाउस संचालक ने पकड़े जाने के डर से इस गेहूं को रातों-रात अपने ही दूसरे वेयरहाउस में शिफ्ट करना शुरू कर दिया। ग्रामीणों ने जब गाडिय़ों की लगातार आवाजाही देखी तो उन्हें शक हुआ और उन्होंने इसकी सीधे शिकायत जिला कलेक्टर बालागुरू से कर दी।
कलेक्टर के निर्देश पर पहुंचे अधिकारी संचालक नहीं दे पाया जवाब
शिकायत को गंभीरता से लेते हुए कलेक्टर बालागुरू ने वेयरहाउसिंग के प्रभारी शाखा प्रबंधक एएल सूर्यवंशी को तुरंत मौके पर पहुंचकर जांच करने के निर्देश दिए। जब शाखा प्रबंधक सूर्यवंशी पूरी टीम के साथ वनखेड़ी पहुंचे तो वहां का नजारा देखकर दंग रह गए। ब्लैकलिस्टेड बद्रीनाथ वेयरहाउस से अनाज को दूसरे गोदाम में स्थानांतरित किया जा रहा था।
जब अधिकारियों ने वेयरहाउस संचालक से इस भंडारण और शिफ्टिंग के दस्तावेजों के बारे में पूछा तो वह कोई संतोषजनक जवाब नहीं दे सका। सरकारी गेहूं यहां कैसे पहुंचा और गोदाम में कुल कितना अनाज है, इसका कोई हिसाब-किताब नहीं मिला। इसके बाद प्रभारी शाखा प्रबंधक ने तुरंत एक्शन लेते हुए वेयरहाउस को सील कर दिया।
साठगांठ की चर्चा तेज
इस बड़े खुलासे के बाद प्रशासनिक महकमे में हडक़ंप मच गया है। एक तरफ जहां शासन-प्रशासन गेहूं खरीदी और भंडारण प्रक्रिया में पूरी पारदर्शिता और सख्ती का दावा कर रहा हैए वहीं दूसरी तरफ ब्लैकलिस्टेड गोदामों में सरकारी अनाज का मिलना पूरी व्यवस्था की पोल खोल रहा है। क्षेत्र के किसानों और आम लोगों के बीच यह चर्चा आम है कि यदि समय रहते ग्रामीणों ने हिम्मत दिखाकर शिकायत न की होती तो रसूखदारों के आगे सरकारी अनाज के भंडारण का यह बड़ा घोटाला फाइलों में ही दबकर रह जाता।
रिकॉर्ड खरीदी की आड़ में खेल की आशंका
बता दें कि जिले में इस साल समर्थन मूल्य पर गेहूं का रिकॉर्ड उपार्जन किया गया है। समर्थन मूल्य खरीदी के जिला प्रभारी आकाश चंदेल के अनुसार अब तक जिले में लगभग 80 हजार किसानों से 6.50 लाख मीट्रिक टन गेहूं की बंपर खरीदी हो चुकी है। भारी आवक के कारण जिले के 40 से ज्यादा वेयरहाउस पूरी तरह फुल हो चुके हैं।
इन्हीं आकस्मिक हालातों का फायदा उठाकर अधिकारियों और रसूखदारों ने यह शॉर्टकट निकाला और नियमों को ताक पर रखकर प्रतिबंधित वेयरहाउसों को भी भरने का खेल शुरू कर दिया। आंकड़ों पर गौर करें तो जिले में साल 2021 के बाद इतनी बड़ी खरीदी कभी नहीं हुई। इससे पहले कोरोना काल के दौरान वर्ष 2020 में 7.34 लाख मीट्रिक टन और 2021 में 6.64 लाख मीट्रिक टन का उपार्जन हुआ था।
एएल सूर्यवंशी प्रभारी शाखा प्रबंधक वेयरहाउसिंग, के अनुसार ग्रामीणों की शिकायत पर कलेक्टर महोदय के निर्देशानुसार हम मौके पर पहुंचे थे। वहां ब्लैकलिस्टेड वेयरहाउस से अनाज को दूसरे गोदाम में शिफ्ट किया जा रहा था। संचालक इस संबंध में कोई वैध दस्तावेज या संतोषजनक जवाब नहीं दे पाया। इसके बाद वेयरहाउस को सील कर दिया गया है। मामले की विस्तृत जांच की जा रही है, जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की सख्त वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।

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