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रेलवे का बड़ा कदम, बुधनी-बरखेड़ा रेल सेक्शन पर होगी फेंसिंग, दिसंबर 2027 तक पूरा करने का लक्ष्य

सीहोर। मध्य प्रदेश में जंगलों से गुजरने वाली ट्रेनों की चपेट में आकर वन्यजीवों के हताहत होने की घटनाओं पर लगाम लगाने के लिए रेलवे ने एक बेहद महत्वपूर्ण और सराहनीय कदम उठाया है। रेलवे अब बेहद संवेदनशील माने जाने वाले बुधनी-बरखेड़ा रेल सेक्शन पर वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए विशेष फेंसिंग लगाने जा रहा है। इस पहल का मुख्य उद्देश्य जंगली जानवरों और मवेशियों को ट्रैक तक पहुंचने से रोकना और ट्रेनों के साथ होने वाले हादसों को पूरी तरह खत्म करना है।

बता दें बुधनी से बरखेड़ा के बीच का रेलखंड पर्यावरण और वन्यजीवों की दृष्टि से बेहद संवेदनशील है, क्योंकि यह पूरा क्षेत्र प्रसिद्ध रातापानी वन क्षेत्र और उसके आसपास के प्राकृतिक वन्यजीव कॉरिडोर से जुड़ा हुआ है। यहां लंबे समय से जंगली जानवरों की आवाजाही पटरियों के आसपास बनी रहती है।
अचानक जानवर के ट्रैक पर आ जाने से न सिर्फ बेजुबान वन्यजीवों की जान खतरे में पड़ती है, बल्कि तेज रफ्तार ट्रेनों के बेपटरी होने या दुर्घटनाग्रस्त होने का भी अंदेशा रहता है। लंबे समय से वन्यजीव प्रेमी और कार्यकर्ता इस क्षेत्र में फेंसिंग और सुरक्षित रास्तों की कमी का मुद्दा उठाते रहे हैं, जिस पर अब रेलवे ने गंभीरता से मुहर लगा दी है।

जानवरों के लिए बनेंगे एनिमल ओवरपास
रेलवे की इस बड़ी परियोजना की सबसे खास बात यह है कि इसमें केवल पटरियों के दोनों ओर फेंसिंग लगाना ही शामिल नहीं है, बल्कि बुधनी-बरखेड़ा सेक्शन में वन्यजीवों के प्राकृतिक रास्ते बाधित न हों, इसके लिए एनिमल ओवरपास (सुरक्षित रास्ते) भी बनाए जा रहे हैं। इससे जानवर बिना किसी खतरे के रेलवे ट्रैक के एक तरफ से दूसरी तरफ आ-जा सकेंगे। पर्यावरण संगठनों ने भी सुझाव दिया था कि फेंसिंग ऐसी हो जिससे वन्यजीवों का प्राकृतिक आवागमन प्रभावित न हो, जिसे रेलवे ने अपनी योजना में शामिल किया है।

530 किमी की परियोजना और 288 करोड़ का खर्च
रेलवे की यह योजना करीब 288 करोड़ रुपये की एक व्यापक परियोजना का हिस्सा है, जिसके तहत बीना-खंडवा रेल मार्ग के संवेदनशील हिस्सों को सुरक्षित किया जाना है। इस पूरी योजना के तहत लगभग 530 किलोमीटर रेल मार्ग को कवर करने का लक्ष्य रखा गया है। रेलवे ने इस महात्वाकांक्षी प्रोजेक्ट को दिसंबर 2027 तक पूरा करने का कड़ा लक्ष्य निर्धारित किया है।

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