ट्विशा शर्मा केस: रिटायर्ड जज गिरिबाला सिंह की जमानत याचिका हाईकोर्ट ने की खारिज, जेल में ही रहेंगी

भोपाल। राजधानी भोपाल के बहुचर्चित ट्विशा शर्मा मौत मामले में जबलपुर हाईकोर्ट से रिटायर्ड जज गिरिबाला सिंह को बड़ा झटका लगा है। बुधवार को सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने उनकी जमानत याचिका खारिज कर दी। अदालत ने अपने रुख में साफ कहा कि मामले में फॉरेंसिक और डिजिटल रिपोर्ट का इंतजार है तथा जांच अभी जारी है, ऐसी स्थिति में आरोपी को रिहा नहीं किया जा सकता। गिरिबाला सिंह 2 जून से भोपाल सेंट्रल जेल में बंद हैं और 4 नवंबर तक उन्हें जेल में 155 दिन लगभग 5 महीने 2 दिन हो चुके हैं।
हाईकोर्ट ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि घटना से ठीक पहले परिजनों के साथ हुई व्हाट्सएप चैट, सीसीटीवी फुटेज और मौत के बाद की परिस्थितियों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। इसके अलावा घटना के तुरंत बाद आरोपियों के आचरण व व्यवहार को भी ध्यान में रखना जरूरी है।
अदालत ने कहा कि केवल यह तर्क दे देना काफी नहीं है कि आवेदिका गिरिबाला सिंह की कोई आपराधिक मंशा नहीं थी। इस बात पर केस डायरी में दर्ज अन्य ठोस सबूतों और परिस्थितियों के साथ विचार करना आवश्यक है। आरोप बेहद गंभीर प्रकृति के हैं और जांच में कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आए हैं, इसलिए फिलहाल जमानत देना संभव नहीं है।
आरोप मेरे नहीं, बेटे के खिलाफ हैं
सुनवाई के दौरान 64 वर्षीय रिटायर्ड जज गिरिबाला सिंह के वकील ने कोर्ट में तर्क दिया कि व्हाट्सएप चैट में लगाए गए सभी आरोप उनके खिलाफ नहीं, बल्कि उनके बेटे समर्थ के खिलाफ हैं। बचाव पक्ष ने कहा कि गिरिबाला ने ट्विशा के खाते में 7.5 लाख ट्रांसफर किए थे, जो दहेज मांगने के आरोपों के विपरीत है। मौत से ठीक पहले क्रूरता का कोई सबूत नहीं है। आवेदिका अपना वॉयस सैंपल भी दे चुकी हैं, इसलिए अब उन्हें आगे हिरासत में रखने की आवश्यकता नहीं है।
सीबीआई और राज्य सरकार ने किया जमानत का कड़ा विरोध
सीबीआई, राज्य सरकार और आपत्तिकर्ता पक्ष ने जमानत का पुरजोर विरोध किया। उन्होंने व्हाट्सएप चैट, सीसीटीवी फुटेज, प्रभावशाली लोगों से कथित संपर्क और लंबित फॉरेंसिक रिपोर्ट को आधार बनाया। सीबीआई ने कोर्ट में कहा कि गिरिबाला सिंह एक प्रभावशाली व्यक्ति हैं और वे पहले मामले की समानांतर जांच करने की कोशिश कर चुकी हैं।



