मध्यप्रदेश

भोजशाला विवाद: इंदौर हाईकोर्ट का ऐतिहासिक फैसला आज संभव, धार से लेकर इंदौर तक हाई अलर्ट

भोपाल. मध्य प्रदेश के धार जिले की ऐतिहासिक और विवादित भोजशाला एवं कमाल मौला मस्जिद मामले में आज 15 मई को एक बेहद महत्वपूर्ण मोड़ आने वाला है. इंदौर हाईकोर्ट की डबल बेंच इस मामले में अपना फैसला सुना सकती है. सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता और हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस के वकील विष्णु शंकर जैन ने ट्वीट कर इस बात की पुष्टि की है कि कोर्ट ने पांच मुख्य याचिकाओं और तीन हस्तक्षेप याचिकाओं पर लंबी सुनवाई के बाद अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था, जो आज सार्वजनिक किया जा सकता है.
मामले की गंभीरता को देखते हुए हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस के याचिकाकर्ताओं ने एक वीडियो संदेश जारी किया है. उन्होंने सभी समुदायों के नागरिकों से अपील की है कि न्यायपालिका की प्रक्रिया पर भरोसा रखें. उन्होंने कहा न्यायपालिका जो भी निर्णय देगी, वह सभी को स्वीकार्य होना चाहिए. हमारा परम कर्तव्य है कि समाज में शांति और भाईचारा बना रहे. वकीलों ने धार एसपी और प्रदेश के डीजीपी से भी कानून-व्यवस्था बनाए रखने का विशेष आग्रह किया है.
सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम, चप्पे-चप्पे पर फोर्स
आज शुक्रवार का दिन होने के कारण प्रशासन अतिरिक्त सतर्कता बरत रहा है. चूंकि शुक्रवार को भोजशाला परिसर में मुस्लिम समाज द्वारा जुम्मे की नमाज अदा की जाती है, इसलिए सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक कड़ा कर दिया गया है.
इंदौर: शहर के राजवाड़ा और अन्य संवेदनशील इलाकों में पुलिस बल तैनात किया गया है.
धार: जिला मुख्यालय और भोजशाला के आसपास के क्षेत्रों में भारी पुलिस बल और सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट मोड पर हैं.
सोशल मीडिया पर नजर: प्रशासन की एक विशेष टीम सोशल मीडिया की निगरानी कर रही है. भडक़ाऊ पोस्ट, अफवाह या गलत जानकारी साझा करने वालों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की चेतावनी दी गई है.
क्या है पूरा विवाद, (2022 से अब तक)
भोजशाला विवाद की कानूनी लड़ाई साल 2022 में नए सिरे से तब शुरू हुई, जब रंजना अग्निहोत्री और उनके साथियों ने हिंदू फं्रट फॉर जस्टिस की ओर से हाईकोर्ट में याचिका दायर की. याचिका में मांग की गई थी कि भोजशाला का धार्मिक स्वरूप स्पष्ट किया जाए और हिंदू समाज को वहां पूर्ण अधिकार सौंपे जाएं.
मामले की गंभीरता को देखते हुए कोर्ट ने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण को वैज्ञानिक सर्वे के आदेश दिए थे. एएसआई की टीम ने 98 दिनों तक परिसर का बारीकी से वैज्ञानिक सर्वेक्षण किया और अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत की. इससे पहले 23 जनवरी 2026 को वसंत पंचमी के दिन सुप्रीम कोर्ट ने परिसर में निर्बाध पूजा-अर्चना की अनुमति देकर मामले की संवेदनशीलता को रेखांकित किया था.
हिंदू पक्ष की दलीलें और पुरातात्विक साक्ष्य
हाईकोर्ट में 6 अप्रैल से 12 मई 2026 तक चली नियमित सुनवाई के दौरान हिंदू पक्ष की ओर से विष्णु शंकर जैनए विनय जोशी और आशीष गोयल ने मजबूत तर्क रखे। उनके मुख्य दावे ये हैं…
ऐतिहासिक साक्ष्य: याचिकाकर्ताओं ने ब्रिटिशकालीन गजेटियर और प्राचीन इतिहासकारों के दस्तावेजों का हवाला देते हुए इसे मां सरस्वती का मंदिर और प्राचीन विद्या केंद्र बताया.
स्थापत्य कला: कोर्ट में बताया गया कि परिसर के स्तंभों, शिलालेखों और दीवारों पर मौजूद आकृतियां हिंदू मंदिर स्थापत्य कला की ओर इशारा करती हैं. वहां मिले अवशेषों में देवी सरस्वती से जुड़े प्रतीकों और प्राचीन नागरी लिपि के दर्शन होते हैं.
इस्लामी संरचना से पूर्व का निर्माण: हिंदू पक्ष का दावा है कि परिसर के मूल संरचनात्मक तत्व इस्लामी स्थापत्य से कहीं अधिक पुराने और मंदिर शैली के हैं.
राजा भोज के ग्रंथ का मिला तकनीकी आधार
अधिवक्ता मनीष गुप्ता ने स्थापत्य संबंधी एक महत्वपूर्ण तकनीकी पहलू अदालत के सामने रखा. उन्होंने धार के राजा भोज द्वारा रचित प्रसिद्ध ग्रंथ समरांगण सूत्रधार का हवाला दिया.
अनुपात का तर्क: ग्रंथ के अनुसार मंदिर निर्माण का मानक अनुपात 4.6 होना चाहिए. एएसआई की सर्वे रिपोर्ट में भोजशाला की चौड़ाई 38.41 मीटर और लंबाई 57.45 मीटर बताई गई है, जो इस ग्रंथ में वर्णित अनुपात के बिल्कुल करीब है.
हवन कुंड: परिसर में मिले हवन कुंड की बनावट और वहां मौजूद सर्पबंदी शैली के शिलालेखों को परमारकालीन मंदिर परंपरा के अनुरूप बताया गया है.
आज के फैसले पर टिकी सबकी नजरें
आज आने वाला फैसला यह तय करेगा कि भोजशाला का भविष्य क्या होगा. क्या वहां पूजा और नमाज की वर्तमान व्यवस्था जारी रहेगी या कोर्ट पुरातात्विक साक्ष्यों के आधार पर किसी एक पक्ष को पूर्ण अधिकार सौंपेगा. धार प्रशासन ने जनता से अपील की है कि वे किसी भी अपुष्ट जानकारी को साझा न करें और जिले की गौरवशाली शांति परंपरा कोबनाए रखने में सहयोग करें.

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