एमपी में नवरात्रि का उल्लास, शक्तिपीठों में उमड़ा भक्तों का सैलाब

भोपाल. आज से शारदीय नवरात्रि की शुरुआत हो गई है और इसी के साथ मध्य प्रदेश के प्रमुख शक्तिपीठों और देवी धामों में आस्था का सैलाब उमड़ पड़ा है. इन मंदिरों की परंपरा, चमत्कारिक कथाएं और ऐतिहासिक महत्व उन्हें अद्वितीय बनाते हैं.
दतिया: पीतांबरा माता: ब्रह्मांड की स्तंभ शक्ति
दतिया में स्थित पीतांबरा देवी पीठ एक ऐसा ही महत्वपूर्ण आध्यात्मिक केंद्र है, जहां बगलामुखी और धूमावती माता की आराधना होती है. माना जाता है कि इनका उद्भव वैदिक काल में हुआ था. यह मंदिर अपनी अद्भुत मान्यताओं के लिए जाना जाता है, जिनमें सबसे प्रमुख है समुद्र मंथन के दौरान ब्रह्मांड को स्थिर रखने के लिए मां बगलामुखी का आह्वान. इसी कारण इन्हें ब्रह्मांड की स्तंभ शक्ति कहा जाता है.
देवास: टेकरी पर रक्तपीठ, मां तुलजा भवानी और चामुंडा माता
देवास जिले में टेकरी पर स्थित चामुंडा देवी मंदिर और तुलजा भवानी मंदिर भी भक्तों के लिए विशेष स्थान रखते हैं. पौराणिक कथाओं के अनुसार यह स्थान उन रक्तपीठों में से एक है, जहां देवी सती का रक्त गिरा था और मां चामुंडा प्रकट हुई थीं. यहां नौ माताओं की उत्पत्ति की मान्यता है, जो इस स्थान को और भी पूजनीय बनाती है.
सलकनपुर: मां विंध्यासन देवी का दिव्य धाम
सीहोर जिले के सलकनपुर में विंध्याचल पर्वत पर विराजमान मां विंध्यासन देवी का दिव्य धाम भी भक्तों के लिए आकर्षण का केंद्र है. लगभग 800 फीट ऊंचे इस पर्वत पर 1401 सीढिय़ां चढक़र भक्त मां के दर्शन करते हैं या फिर रोप-वे का सहारा लेते हैं. इस साल खास बात यह है कि भक्तों के निजी वाहन भी पहाड़ी पर ऊपर जा सकेंगे. यहां रक्तबीज वध की कथा के कारण इसे सिद्धपीठ माना जाता है.
मैहर: मां शारदा का 52 शक्तिपीठों में से एक
मैहर जिले में त्रिकूट पर्वत पर 600 फीट की ऊंचाई पर स्थित मां शारदा मंदिर 52 शक्तिपीठों में से एक है. पौराणिक कथाओं के अनुसार यहीं पर मां सती का हार गिरा था, जिसके कारण इस स्थान को ‘मईया का हार’ यानी मैहर कहा जाता है. सबसे दिलचस्प बात यह है कि यहां आज भी वीर योद्धा आल्हा और ऊदल के आरती में आने की मान्यता है, जो भक्तों को एक अलग ही रोमांच देती है.



