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सागर में जहरीले घूंट का तांडव, 10 की मौत, 25 से ज्यादा जिंदगी और मौत के बीच झूल रहे

भोपाल. बेखौफ अवैध कारोबार… सिस्टम की अनदेखी… और एक घूंट जहर ने ले ली हंसती-खेलती कई जिंदगियां. मध्य प्रदेश के सागर जिले से एक बेहद दर्दनाक और रूह कंपा देने वाली खबर सामने आ रही है. सागर के बंडा इलाके में संदिग्ध जहरीली शराब के तांडव ने कई परिवारों के चिराग बुझा दिए हैं. अब तक 10 लोगों की मौत की आधिकारिक पुष्टि हो चुकी है, जबकि दर्जनों लोग जिंदगी और मौत के बीच जंग लड़ रहे हैं. अस्पताल में अफरा तफरी का माहौल है और प्रशासन में हडक़ंप. आखिर इस जहरीले कारोबार का जिम्मेदार कौन है.
बता दें ग्राम घूघरा, जालमपुर और बराज समेत आसपास के गांवों में जैसे ही लोगों ने शराब का सेवन किया, वैसे ही एक-एक कर लोगों की तबीयत बिगडऩे लगी. सिरदर्द, आंखों के आगे अंधेरा और फिर … मौत का सन्नाटा.
बता दें तबीयत बिगड़ते ही मरीजों को बंडा के सिविल अस्पताल लाया गया. लेकिन हालात इतने बिगड़ चुके थे कि डॉक्टरों के हाथ-पांव फूल गए. गंभीर रूप से बीमार 25 से ज्यादा मरीजों को तुरंत सागर के बीएमसी और जिला अस्पताल रेफर किया गया.
सीएमएचओ ने की पुष्टि
अब तक 10 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है. 25 से ज्यादा लोगों को बेहतर इलाज के लिए सागर रेफर किया गया है. हमारी डॉक्टर्स की टीम रात से ही मौके पर तैनात है. लोगों से अपील है कि किसी को भी जरा से लक्षण दिखें तो तुरंत अस्पताल आएं.
इधर घटना की खबर मिलते ही जिला प्रशासन में हडक़ंप मच गया. सागर कलेक्टर प्रतिभा पाल और पुलिस अधीक्षक अनुराग सुजानिया खुद भारी पुलिस बल के साथ ग्राउंड जीरो पर पहुंचे. प्रभावित गांवों में मुनादी कराई जा रही है और अस्पताल में मरीजों के इलाज की व्यवस्था संभाली जा रही है.
कांग्रेस ने साधा निशाना
इस त्रासदी के बाद अब सियासत भी गरमा गई है. पूर्व केंद्रीय मंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अरुण यादव ने सरकार पर सीधा हमला बोला है. अरुण यादव ने ट्वीट कर लिखा कि सरकार के संरक्षण में अवैध शराब का कारोबार फल फूल रहा है. बंडा ब्लॉक के गांवों में जहरीली शराब ने कई लोगों की जान ले ली. इस पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच होनी चाहिए और सांठगांठ करने वाले जिम्मेदार अधिकारियों पर कठोर कार्रवाई की जाए.
एक तरफ उठतीं अर्थियां और दूसरी तरफ उठते सियासी सवाल. पुलिस और आबकारी विभाग अब जांच की बात कह रहा है, लेकिन सवाल वही है, आखिर कब तक अवैध शराब का यह खूनी खेल बेकसूरों की जान लेता रहेगा. क्या जिम्मेदार अफसरों पर गाज गिरेगी या मामला जांच की फाइलों में दबकर रह जाएगा.

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