एक तरफ सम्मान, दूसरी तरफ संग्राम… शिक्षक दिवस पर भोपाल में गरजे 70 हजार अतिथि शिक्षक

भोपाल. जहां एक तरफ पूरा देश आज शिक्षक दिवस मना रहा है और गुरुओं को नमन कर रहा है, वहीं मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल से एक अलग ही तस्वीर सामने आ रही है. प्रदेश भर के हजारों अतिथि शिक्षक आज खुशियां मनाने के बजाय शाहजहानी पार्क में सडक़ों पर उतरकर प्रदर्शन कर रहे हैं. वजह, तीन साल पहले की गई वो घोषणाएं, जो आज तक सिर्फ कागजों में सिमट कर रह गईं.
मामला 2 सितंबर 2023 का है, जब भोपाल के लाल परेड मैदान में अतिथि शिक्षक पंचायत बुलाई गई थी. तब तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने मंच से बड़े-बड़े वादे किए थे…
वार्षिक अनुबंद: पूरे साल का पक्का सेवा अनुबंध.
नौकरी की गारंटी: बीच सत्र में किसी को बेरोजगार न करना.
स्थायी रोजगार: गुरुजियों की तर्ज पर नीति बनाकर नियमित करना और सीधी भर्ती में बोनस अंक देना.
लेकिन आज तीन साल बीत जाने के बाद भी स्थिति जस की तस बनी हुई है. अतिथि शिक्षक समन्वय समिति के प्रदेश अध्यक्ष सुनील सिंह परिहार का कहना है कि जब केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया, शिवराज सिंह चौहान और खुद मुख्यमंत्री मोहन यादव समर्थन कर चुके हैं तो 18 सालों से सेवा दे रहे 70 हजार शिक्षकों का भविष्य अब तक अधर में क्यों अटका है.
स्कूल शिक्षा विभाग में 7 हजार से ज्यादा नई नियुक्तियों की प्रक्रिया जारी है. हालांकि संगठन का दावा है कि इससे जिलों में तैनात शिक्षकों के रोजगार पर बड़ा असर नहीं पड़ेगा क्योंकि विभाग पहले ही तालमेल बैठा चुका है.
इतना ही नहीं इस लड़ाई को और मजबूती देने के लिए संगठन ने अपना पुनर्गठन भी किया है. महिलाओं की सशक्त भागीदारी तय करने के लिए स्वाति श्रीवास्तव को अतिथि शिक्षक समन्वय समिति के महिला मोर्चा की कमान सौंपी गई है.
क्या सिर्फ चुनाव के लिए थीं घोषणाएं, उठ रहे गंभीर सवाल
बता दें आज शिक्षक दिवस के मौके पर मध्य प्रदेश के 70 हजार अतिथि शिक्षक सरकार से सिर्फ एक ही सवाल पूछ रहे हैं, क्या घोषणाएं सिर्फ चुनाव जीतने का जरिया होती हैं. देखना होगा कि शाहजहानी पार्क से उठी यह आवाज क्या वल्लभ भवन के गलियारों तक पहुंचेगी और क्या इन गुरुओं को उनका हक मिल पाएगा.



