आसमान से बरसी ‘सफेद आफत’, एमपी के 17 जिलों में फसलें बर्बाद, बिछ गई ओलों की चादर

भोपाल। मध्यप्रदेश में कुदरत ने अन्नदाता पर ऐसा कहर बरपाया है कि महीनों की खून पसीने की मेहनत महज 30 मिनट में मिट्टी में मिल गई। भोपाल, ग्वालियर.चंबल और मालवा सहित प्रदेश के 15 से अधिक जिलों में हुई भीषण ओलावृष्टि ने खेतों के परिदृश्य को ही बदल दिया है। लहलहाती फसलें अब ओलों की सफेद चादर के नीचे दफन हो चुकी हैं।
सीहोर जिले के ग्राम हिगोनी और पडियाला में तबाही का मंजर देखने को मिला। यहां किसान मुकेश सिंह गौर ने रुंधे गले से बताया कि उन्होंने 2 एकड़ में गेहूं लगाया था, जो अब पूरी तरह नष्ट हो चुका है। वहीं महिला किसान विद्या सिंह का दर्द भी कम नहीं है, उनकी सरसों की फसल आंधी और ओलों के कारण खेत में आड़ी पड़ गई है। विद्या सिंह के अनुसार सरसों में प्रति एकड़ 10-12 हजार और गेहूं में प्रति एकड़ 30 हजार रुपये तक की लागत आई थी, जो अब डूब चुकी है।
प्रदेशभर में तबाही का घेरा
सिर्फ सीहोर ही नहीं बल्कि प्रदेश के अन्य जिलों में भी हालात भयावह हैं…
गुना: यहां किसान पहले ही यूरिया की किल्लत से जूझ रहे थे, अब ओलों ने धनिया बेल्ट को उजाड़ दिया है।
शाजापुर: यहां 100-100 ग्राम वजनी ओलों ने गेहूं की बालियों को काटकर जमीन पर बिखेर दिया।
बुरहानपुर: केला और मक्का की फसलों को भारी नुकसान पहुंचा है।
शिवपुरी: जिले के 17 गांवों में ओलावृष्टि ने फसलों को भारी क्षति पहुंचाई है।
सियासत गर्माई, मुआवजे की मांग तेज
इस प्राकृतिक आपदा पर राजनीति भी शुरू हो गई है। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को पत्र लिखकर तत्काल आर्थिक सहायता की मांग की है। विपक्ष का कहना है कि पिछली सोयाबीन की फसल का मुआवजा भी अभी तक कई किसानों को नहीं मिला है, ऐसे में सरकार को इस बार देरी नहीं करनी चाहिए।
सरकार का रुख, खेतों में उतरेगा राजस्व अमला
मामले की गंभीरता को देखते हुए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सभी जिला कलेक्टर्स को तत्काल सर्वे के निर्देश दिए हैं। प्रदेश के राजस्व मंत्री करण सिंह वर्मा ने भरोसा दिलाया है कि सरकार संकट की इस घड़ी में किसानों के साथ खड़ी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि सर्वे के बाद जल्द ही राहत राशि वितरित की जाएगी।
इन जिलों में सबसे ज्यादा असर
मध्य प्रदेश के हरदा, गुना, अशोकनगर, शाजापुर, शिवपुरी, मुरैना, उज्जैन, आगर मालवा, बुरहानपुर, सीहोर, भोपाल और ग्वालियर सहित कुल 17 जिलों में बेमौसम बारिश और ओलों ने कहर ढाया है। अब देखना यह है कि प्रशासन का सर्वे कितनी जल्दी पूरा होता है और बेबस किसान के आंसुओं को पोंछने के लिए राहत राशि कब तक पहुंचती है।



