भोपाल में जल सुनवाई, सीहोर में कलेक्टर के आदेश ठंडे बस्ते में

भोपाल। इंदौर के भागीरथपुरा में दूषित पानी से हुई मौतों के बाद मुख्यमंत्री मोहन यादव के सख्त निर्देशों का असर राजधानी भोपाल में तो दिख रहा है, लेकिन पड़ोसी जिले सीहोर में सरकारी आदेश हवा साबित हो रहे हैं। प्रदेश सरकार ने 13 जनवरी से हर मंगलवार को जल सुनवाई करने के आदेश दिए थे, ताकि जनता को साफ पानी मिल सके।
राजधानी भोपाल में मंगलवार को पांचवीं जल सुनवाई आयोजित की गई। यहां जिला प्रशासन ने मुस्तैदी दिखाते हुए सभी 85 वार्डों में सुबह 11 से 1 बजे तक शिविर लगाए। खास बात यह रही कि भोपाल जिला प्रशासन ने कर्मचारियों को पानी की शुद्धता परखने के लिए 11 पैमानों वाली आधुनिक किट दी गई है। इस अभियान में 200 से अधिक कर्मचारी और एक्सपट्र्स की टीम मैदान में रही।
सीहोर: निर्देशों के बाद भी सन्नाटा
एक तरफ भोपाल में प्रशासन सक्रिय है, वहीं दूसरी ओर सीहोर जिला प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवालिया निशान लग रहे हैं। सीहोर कलेक्टर बालागुरु के. ने जिले में जल सुनवाई आयोजित करने के निर्देश तो जारी किए थे, लेकिन हकीकत यह है कि जिले में अब तक एक बार भी जल सुनवाई का आयोजन धरातल पर नहीं हो सका है। विभाग की इस सुस्ती के कारण सीहोर की जनता दूषित पानी के खतरे के बीच जीने को मजबूर है।
मुख्यमंत्री की मंशा पर फिर रहा पानी
सरकार की मंशा साफ है कि पानी से जुड़ी समस्याओं का वार्ड और गांव स्तर पर ही समाधान हो जाए, लेकिन सीहोर में जिम्मेदारों की लापरवाही सीएम के निर्देशों पर भारी पड़ रही है। सवाल यह उठता है कि जब राजधानी में पांचवीं बार सुनवाई हो सकती है तो सीहोर में अब तक एक भी शिविर क्यों नहीं लगा?



