बस्तर में राष्ट्रपति मुर्मू का भावुक संबोधन, छत्तीसगढ़ आना घर आने जैसा, हिंसा छोड़ मुख्यधारा में लौटें गुमराह लोग

रायपुर। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू शनिवार को जगदलपुर के लालबाग मैदान में आयोजित बस्तर पंडुम उत्सव में शामिल हुईं। पारंपरिक आदिवासी वेशभूषा, लोक नृत्यों और वाद्ययंत्रों की गूंज के बीच राष्ट्रपति ने बस्तर की जनता को संबोधित करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ आना उन्हें हमेशा अपने घर आने जैसा महसूस होता है। उन्होंने बस्तर की प्राचीन संस्कृति और सुंदरता की जमकर सराहना की और भटके हुए युवाओं से हिंसा का रास्ता छोडऩे की अपील की।
राष्ट्रपति ने अपने संबोधन में कहा कि पिछले चार दशकों से नक्सलवाद ने बस्तर के आदिवासियों का बहुत नुकसान किया है, लेकिन अब तस्वीर बदल रही है। उन्होंने कहा बस्तर अब नक्सल मुक्त हो रहा है। बड़ी संख्या में लोग हथियार डाल रहे हैं। मैं मुख्यधारा में लौटने वालों का स्वागत करती हूं और कहना चाहती हूं कि जो लोग बरगला रहे हैंए उनकी बातों में न आएं।
सीएम की घोषणा: 31 मार्च 2026 तक नक्सलवाद खत्म करने का लक्ष्य
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने इस मौके पर एक बड़ा संकल्प दोहराया। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार ने 31 मार्च 2026 तक बस्तर से नक्सलवाद को पूरी तरह खत्म करने का लक्ष्य रखा है। सीएम ने बताया कि इस बार बस्तर पंडुम में 54 हजार से ज्यादा लोगों ने पंजीयन कराया है और विधाओं की संख्या भी 7 से बढ़ाकर 12 कर दी गई है। उन्होंने राष्ट्रपति को ढोकरा आर्ट से बना कर्मा वृक्ष और कोसा सिल्क का गमछा भेंट कर सम्मानित किया।
बस्तर की कला को विश्व स्तर पर पहचान: राज्यपाल
राज्यपाल रमेन डेका ने कहा कि बस्तर की ढोकरा शिल्प कला ने पूरी दुनिया में अपनी पहचान बनाई है। उन्होंने कहा कि यहाँ के लोग जलए जंगल और जमीन के बीच रहकर प्रकृति का संदेश देते हैं। कार्यक्रम में संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल ने बताया कि इस बार उत्सव में जनजातीय आभूषणों, व्यंजनों और वेशभूषा का भव्य प्रदर्शन किया जा रहा है।
राष्ट्रपति के दौरे के बड़े मायने
आत्मगौरव का प्रतीकरू देश की पहली आदिवासी महिला राष्ट्रपति का बस्तर आना यहाँ के समाज के लिए सम्मान और अपनी बेटी के आगमन जैसा महसूस हुआ।
सांस्कृतिक पहचान: बस्तर पंडुम को अब राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान मिलेगी।
लोकतंत्र का संदेश: इस दौरे ने संदेश दिया कि देश का संविधान और शीर्ष नेतृत्व बस्तर के विकास और सुरक्षा के प्रति पूरी तरह गंभीर है।
कार्यक्रम की खास झलकियां
लोकार्पण व अवलोकन: राष्ट्रपति ने कार्यक्रम स्थल पर लगे स्टॉल्स का बारीकी से निरीक्षण किया और आदिवासी परंपराओं को सराहा।
भावुक क्षण: आत्मसमर्पण कर चुके नक्सलियों ने भी मंच के सामने बैठकर राष्ट्रपति के विचारों को सुना।
लोक नृत्य: बस्तर की विभिन्न जनजातियों ने अपनी पारंपरिक वेशभूषा में मनमोहक नृत्य प्रस्तुत किए।



