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मप्र के मेडिकल-डेंटल कॉलेजों में एनआरआई कोटे से करोड़ों का फर्जीवाड़ा: एनएसयूआई ने लगाया बड़ा आरोप

भोपाल। भारतीय राष्ट्रीय छात्र संगठन एनएसयूआई ने मध्यप्रदेश के निजी मेडिकल और डेंटल कॉलेजों में चल रहे एक बड़े घोटाले का पदार्फाश किया है। संगठन ने आरोप लगाया है कि एमबीबीएस, बीडीएस और पीजी (एमडी/एमएस/एमडीएस) कोर्सों में एनआरआई कोटे के प्रवेश में करोड़ों रुपये का फर्जीवाड़ा किया जा रहा है, जिससे गरीब और मेधावी छात्रों का भविष्य खतरे में है।
एनएसयूआई के प्रदेश उपाध्यक्ष रवि परमार ने 29 अगस्त को इस मामले की विस्तृत शिकायत मुख्य सचिव, लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग के प्रमुख सचिव और आयुक्त को भेजी है। एनएसयूआई का दावा है कि इस घोटाले के जरिए हर साल 800 से 1000 करोड़ रुपये की अवैध कमाई की जा रही है, जिसमें शिक्षा माफिया और विभाग के बड़े अधिकारी भी शामिल हैं।
घोटाले के मुख्य बिंदु
नियमों का उल्लंघन: एनएसयूआई का आरोप है कि निजी कॉलेज जानबूझकर एनआरआई कोटे की काउंसलिंग प्रक्रिया में गड़बड़ी करते हैं और पैसे लेकर मनमाने ढंग से प्रवेश देते हैं।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश की अनदेखी: सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया था कि सिर्फ माता-पिता, भाई-बहन, चाचा-चाची, मामा-मामी, दादा-दादी और नाना-नानी ही छात्रों को स्पॉन्सर कर सकते हैं। लेकिन मध्यप्रदेश में कोई भी व्यक्ति पैसे लेकर स्पॉन्सर बन जाता है।
फर्जी दस्तावेज और भुगतान: संगठन का कहना है कि छात्रों को नकली एनआरआई स्पॉन्सर सर्टिफिकेट दिए जाते हैं। नियम के अनुसार फीस स्पॉन्सर के खाते से आनी चाहिएए लेकिन भुगतान छात्र या उसके परिवारजन ही करते हैं।
मूल निवासी छात्रों का नुकसान: दूसरे राज्यों के छात्रों को मोटी रकम लेकर फर्जी मूल निवासी प्रमाण पत्र बनवाकर प्रवेश दिया जा रहा है। इससे उन मेधावी छात्रों को सीटें नहीं मिल पातीं, जिन्हें नियमानुसार प्राथमिकता मिलनी चाहिए।
सिर्फ क्लिनिकल ब्रांच में सीटें: पीजी कोर्स में एनआरआई सीटें केवल ज्यादा फीस वाली क्लिनिकल ब्रांच (जैसे डर्मेटोलॉजी, रेडियोलॉजी, मेडिसिन) में ही रखी जाती हैं, जबकि नॉन-क्लिनिकल ब्रांच में नहीं। यह नियम के विरुद्ध है।
भारी रिश्वतखोरी: एनएसयूआई ने दावा किया है कि इस फर्जीवाड़े के लिए एमबीबीएस में प्रति छात्र 1.5 से 2 करोड़ और पीजी में लगभग 3 करोड़ रुपये तक वसूले जाते हैं।
एनएसयूआई की प्रमुख मांगें
– सभी एनआरआई कोटे से प्रवेश लेने वाले छात्रों के दस्तावेजों की जांच हाईकोर्ट के रिटायर्ड जज की निगरानी में एनएसटीएफ से करवाई जाए।
– प्रवेशित छात्रों के दस्तावेजों का सत्यापन शासकीय अधिकारियों द्वारा करवाया जाए और उन्हें सार्वजनिक पोर्टल पर अपलोड किया जाए।
– दोषी निजी कॉलेज प्रबंधन और संबंधित अधिकारियों पर एफआईआर दर्ज की जाए।
– भविष्य में इस तरह की धांधली रोकने के लिए कड़े और पारदर्शी नियम लागू किए जाएं।
– एनएसयूआई ने चेतावनी दी है कि अगर सरकार ने जल्द ही इस मामले पर कार्रवाई नहीं की तो वे सडक़ से सदन तक उग्र आंदोलन करेंगे और जरूरत पडऩे पर हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा भी खटखटाएंगे।

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