एमपी की नई आबकारी नीति, प्रदेश में नहीं खुलेगी कोई नई शराब दुकान, अहाते भी रहेंगे बंद

भोपाल। मध्य प्रदेश सरकार ने वर्ष 2026-27 के लिए अपनी नई आबकारी नीति घोषित कर दी है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में कैबिनेट द्वारा मंजूर की गई इस नीति में स्पष्ट किया गया है कि प्रदेश में कोई भी नई शराब दुकान नहीं खोली जाएगी। सरकार ने सामाजिक सरोकारों और पवित्रता का ध्यान रखते हुए कई कड़े प्रावधानों को यथावत रखा है।
नीति के 5 बड़े फैसले
नई दुकानों पर ब्रेक: पूरे प्रदेश में कहीं भी कोई नई मदिरा दुकान नहीं खुलेगी।
अहाते नहीं खुलेंगे: शराब दुकानों के पास बैठकर पीने की व्यवस्था यानी अहाते पहले की तरह पूरी तरह बंद रहेंगे।
नवीनीकरण का विकल्प खत्म: पुरानी मदिरा दुकानों के सीधे नवीनीकरण की सुविधा अब समाप्त कर दी गई है। अब हर दुकान के लिए नई नीलामी होगी।
धार्मिक मर्यादा का सम्मान: नर्मदा तट से 5 किलोमीटर की दूरी तक शराब दुकान न खोलने का प्रतिबंध जारी रहेगा। साथ ही पवित्र नगर घोषित शहरों में मदिरा बिक्री पर पाबंदी बरकरार रहेगी।
एकाधिकार पर लगाम: शराब माफिया और सिंडिकेट को रोकने के लिए नियम बनाया गया है कि एक समूह में अधिकतम 5 दुकानें ही हो सकती हैं।
पारदर्शिता के लिए ई.ऑक्शन और ई.टेंडर
नई नीति के तहत प्रदेश की सभी 3,553 मदिरा दुकानों का आवंटन ई.टेंडर और ई.ऑक्शन के माध्यम से होगा। जालसाजी रोकने के लिए इस बार सुरक्षा राशि के रूप में केवल ई.चालान या ई.बैंक गारंटी ही स्वीकार की जाएगी। सावधि जमा या साधारण बैंक गारंटी मान्य नहीं होगी। ई.नीलामी के लिए आरक्षित मूल्य वर्तमान वर्ष के मूल्य में 20 प्रतिशत की वृद्धि के साथ तय किया जाएगा।
निर्यात और हेरिटेज मदिरा को प्रोत्साहन
सरकार ने ईज ऑफ डूइंग बिजनेस को बढ़ावा देते हुए शराब विनिर्माताओं को बड़ी राहत दी है। अब उन्हें अपने उत्पाद की कीमत मंजूर कराने की जरूरत नहीं होगी, वे स्वयं पोर्टल पर कीमतें घोषित कर सकेंगे। इसके अलावा महुआ से बनी हेरिटेज मदिरा को अन्य राज्यों में ड्यूटी फ्री कराने के लिए क्रॉस.ड्यूटी फ्री का प्रावधान किया गया है, जिससे आदिवासी स्व.सहायता समूहों को लाभ होगा।
व्यापारिक व्यवस्था में बदलाव
जिले की दुकानों के समूहों को आरक्षित मूल्य के आधार पर तीन से चार बैचों में बांटा जाएगा। इनकी नीलामी प्रक्रिया भी अलग-अलग चरणों में संपन्न होगी, ताकि अधिक से अधिक छोटे कारोबारी भी इस प्रक्रिया में भाग ले सकें। बार और विनिर्माण इकाइयों की लाइसेंस फीस में कोई बदलाव नहीं किया गया है।



