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एमपी पर कर्ज का पहाड़, होली के बाद सरकार ने फिर लिया 5800 करोड़ का कर्ज

भोपाल। मध्य प्रदेश की अर्थव्यवस्था पर कर्ज का बोझ लगातार बढ़ता जा रहा है। होली के त्यौहार पर 6300 करोड़ रुपए की उधारी लेने के ठीक बाद अब मोहन यादव सरकार ने मंगलवार को एक बार फिर बाजार से 5800 करोड़ रुपए का नया कर्ज लेने का फैसला किया है। इस नई उधारी के साथ ही प्रदेश पर कुल कर्ज का आंकड़ा 5 लाख 6 हजार 640 करोड़ रुपए के ‘डेंजर मार्क’ को पार कर गया है।
रिजर्व बैंक के ई कुबेर प्लेटफॉर्म के जरिए लिए जा रहे इस कर्ज को तीन अलग-अलग किस्तों में लिया गया है। इसमें 1900 करोड़ रुपए 10 साल के लिए, 1700 करोड़ रुपए 14 साल के लिए और 2200 करोड़ रुपए 21 साल की लंबी अवधि के लिए लिए गए हैं। सरकार को यह राशि बुधवार को प्राप्त हो जाएगी।
उधारी का चौंकाने वाला गणित
सिर्फ फरवरी और मार्च के कुछ हफ्तों के भीतर ही सरकार ने भारी-भरकम उधारी ली है।
आज का नया कर्ज: 5800 करोड़ रुपए
होली से ठीक पहले: 6300 करोड़ रुपए
17 फरवरी को लिया: 5600 करोड़ रुपए

पुराना कर्ज चुकाने के लिए नया कर्ज
आर्थिक जानकारों का मानना है कि प्रदेश जिस रफ्तार से उधारी ले रहा है, उसका एक बड़ा हिस्सा पुराने कर्ज का ब्याज और मूलधन चुकाने में ही खर्च हो रहा है। हालांकि सरकार का तर्क है कि विकास योजनाओं, अधोसंरचना निर्माण और कृषि क्षेत्र में निवेश के लिए यह राशि अनिवार्य है। सरकार केंद्र द्वारा दिए जा रहे 50 साल के ब्याज-मुक्त कर्ज का लाभ उठाने का तर्क भी दे रही है।
5 लाख करोड़ के पार हुआ कर्ज
पिछले वित्तीय वर्ष 31 मार्च 2025 के अंत तक प्रदेश पर 4.21 लाख करोड़ का कर्ज था, जो अब एक साल के भीतर ही 5 लाख करोड़ के पार हो गया है। जानकारों के अनुसार उधारी की यही रफ्तार रही तो आने वाले समय में जनकल्याणकारी योजनाओं के लिए फंड जुटाना सरकार के लिए बड़ी चुनौती बन सकता है।

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