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मोबाइल गेमिंग की लत ने छीनी मासूम की जान, भोपाल में 8वीं के छात्र ने दी जान

भोपाल। शहर के पिपलानी क्षेत्र में मोबाइल गेमिंग की जानलेवा लत ने एक और घर का चिराग बुझा दिया। श्रीराम कॉलोनी छत्रसाल नगर में रहने वाले 14 वर्षीय छात्र अंश साहू ने अपने घर में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। शुरुआती जांच और परिजनों के बयानों से आशंका जताई जा रही है कि अंश ब्लू व्हेल जैसे किसी प्रतिबंधित और खतरनाक ऑनलाइन गेम का शिकार हुआ था।
बता दें अंश अपने माता-पिता का इकलौता बेटा था। उसके माता-पिता, जो निजी स्कूल में शिक्षक हैं, एक रिश्तेदार के कार्यक्रम में गए हुए थे। जब वे घर लौटे तो बेटे को फंदे से लटका देख उनके पैरों तले जमीन खिसक गई। उसे तुरंत अस्पताल ले जाया गया, लेकिन डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। पुलिस को मौके से कोई सुसाइड नोट नहीं मिला है, लेकिन छात्र का मोबाइल फोन बरामद कर लिया गया है, जिसकी जांच साइबर एक्सपट्र्स से कराई जा रही है।
गेम के लास्ट टास्क का खौफनाक संदेह
परिजनों के अनुसार अंश पिछले कुछ समय से मोबाइल पर कुछ अजीब टास्क वाले गेम खेल रहा था। आशंका है कि वह गेम के अंतिम और आत्मघाती टास्क को पूरा करने के जुनून में था। साइबर एक्सपट्र्स का कहना है कि ब्लू व्हेल जैसा गेम वास्तव में एक मनोवैज्ञानिक जाल हैए जो 50 दिनों तक चलता है। इसमें खिलाड़ी को डरावनी फिल्में देखने से लेकर खुद को चोट पहुंचाने तक के टास्क दिए जाते हैं और अंत में आत्महत्या के लिए उकसाया जाता है।
सरकार ने लगा रखा है प्रतिबंध
भारत सरकार ने 2017-18 में ही ब्लू व्हेल गेम पर प्रतिबंध लगा दिया था, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि यह अब नए नामों से इंटरनेट पर मौजूद है। साइबर एक्सपर्ट के अनुसार ऐसे गेम एडमिनिस्ट्रेटर खिलाड़ी को बीच में गेम छोडऩे पर परिवार को नुकसान पहुंचाने की धमकी देकर डराते भी हैं।
अभिभावकों के लिए चेतावनी के संकेत
मनोवैज्ञानिकों और विशेषज्ञों ने पालकों को सलाह दी है कि वे बच्चों के व्यवहार पर नजर रखें। यदि बच्चा अचानक अकेला रहने लगे। देर रात तक जागकर फोन चलाए। व्यवहार में चिड़चिड़ापन आए या गुमसुम रहे। शरीर पर किसी तरह के निशान या कट हों। तो यह गंभीर खतरे का संकेत हो सकता है।

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