जादोनी परिवार ने दादा गुरू के स्वागत में नर्मदा किनारे बिछाए पलक-पावड़े, 2 किमी तक फूलों से सजाई नर्मदा पट्टी

सीहोर। मां नर्मदा के पावन तट पर इन दिनों आस्था और समर्पण का एक अभूतपूर्व दृश्य देखने को मिल रहा है। अपनी कठिन योग साधना के लिए विख्यात सिद्ध महायोगी दादा गुरु महाराज (समर्थ भैया जी सरकार) अपनी चौथी नर्मदा परिक्रमा के दौरान 1300 श्रद्धालुओं के जत्थे के साथ छीपानेर पहुंचे। दादा गुरु के आगमन पर उनके अनन्य भक्त जादोनी परिवार ने श्रद्धा की ऐसी मिसाल पेश की, जिसकी चर्चा पूरे क्षेत्र में है।

दादा गुरु के बाबरी आगमन पर जादोनी परिवार ने पलक-पावड़े बिछा दिए। परिवार की ओर से नर्मदा किनारे लगभग दो किलोमीटर तक फूलों का कालीन बिछाकर गुरुदेव का भव्य स्वागत किया गया। समाजसेवी शतुलाल जादोनी, सतीश जादोनी, रामकृष्ण, संजय और जगदीश जादोनी सहित पूरे परिवार ने नर्मदा तट पर गुरुदेव की अगवानी की।

गुरु आदेश पर बनेगा ‘लक्ष्मीनारायण आश्रम’
इस अवसर पर जादोनी परिवार ने दादा गुरु के प्रति अपनी अटूट निष्ठा व्यक्त करते हुए एक बड़ा संकल्प लिया। दादा गुरु के आदेशानुसार अब बाबरी में जादोनी परिवार द्वारा आश्रम का निर्माण कराया जाएगा। इस आश्रम को ‘लक्ष्मीनारायण आश्रम’ नाम दिया गया है, जो भविष्य में क्षेत्र के भक्तों के लिए अध्यात्म और सेवा का प्रमुख केंद्र बनेगा।
विज्ञान के लिए पहेली
6 वर्षों से निराहार हैं दादा गुरु दादा गुरु महाराज की यह यात्रा आध्यात्मिक शक्ति का जीवंत प्रमाण है। वे पिछले 6 वर्षों से पूरी तरह निराहार हैं। वे अन्न या फल का सेवन नहीं करतेए बल्कि पूरे दिन में केवल एक बार नर्मदा जल ग्रहण कर अपनी कठिन यात्रा और साधना जारी रखे हुए हैं। उनकी इस योग शक्ति को देखकर जहां वैज्ञानिक और आधुनिक जगत हैरान है, वहीं भक्त इसे मां नर्मदा की असीम कृपा मान रहे हैं।
धर्म के साथ धरती बचाने का संकल्प
5 नवंबर को ओंकारेश्वर से शुरू हुई यह परिक्रमा केवल धार्मिक यात्रा नहीं, बल्कि पर्यावरण संरक्षण का एक महाअभियान भी है। दादा गुरु के नेतृत्व में 1300 परिक्रमावासी मार्ग को कचरा मुक्त रखने, नर्मदा जल की शुद्धता बनाए रखने और ग्रामीणों को स्वच्छता के प्रति जागरूक करने का संदेश दे रहे हैं।



