मध्यप्रदेश

‘मैं भी संघ का सूक्ष्म घटक’ इछावर के बीजेपी नेता अजय पटेल के संघ पर विचार सोशल मीडिया पर वायरल, समाज से पांच कार्यों में जुटने की अपील

सीहोर। भारतीय जनता पार्टी के इछावर क्षेत्र के नेता अजय सिंह पटेल द्वारा राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े अपने विचारों को सोशल मीडिया पर पोस्ट करने के बाद वे चर्चा में आ गए हैं। अजय सिंह पटेल ने खुद को संघ का एक साधारण स्वयंसेवक बताते हुए, समाज से संघ की अपेक्षाओं और पूजनीय सरसंघचालक जी द्वारा दिए गए ‘पांच परिवर्तनों’ के विषय पर तीव्रता से कार्य करने का आह्वान किया है। उनकी यह पोस्ट सोशल मीडिया प्लेटफॉम्र्स पर तेजी से वायरल हो रही है।
पटेल ने अपनी पोस्ट में लिखा है मैं भी संघ का एक सूक्ष्म घटक हूं। उन्होंने आगे चिंतन करते हुए कहा कि संघ से समाज ने ऐसी-ऐसी अपेक्षाएं संजो ली हैं कि संघ को अपनी गति और तीव्र करनी होगी और इसमें बहुत से नए लोगों की भी आवश्यकता होगी। इसमें पुराने और अनुभवी लोग भी यथशक्ति अपना योगदान दे सकते हैं।
सरसंघचालक के पांच परिवर्तनों पर जोर
पटेल ने सरसंघचालक जी द्वारा रखे गए पांच परिवर्तन के विषय को महत्वपूर्ण बताया है। उन्होंने कहा कि यह विषय समाज के लिए नया हो सकता है, लेकिन स्वयंसेवक के लिए पुराना है। उनके अनुसार अब इन पांच विषयों पर तीव्रता से कार्य करना होगा ताकि इसके सुखद परिणाम से देश और समाज सुदृढ़ हो सके। उन्होंने यह भी कहा कि संघ के प्रत्यक्ष स्वरूप और वैचारिक स्वरूप को आज विश्व भर में मान्यता है और समय भी अनुकूल है, इसलिए इस सबका लाभ उठाना चाहिए।
पूरे समाज को योगदान देने की अपील
पटेल ने सवाल उठाया कि क्या यह दायित्व केवल संघ के स्वयंसेवक और कार्यकर्ता का ही है। उन्होंने समाज की भूमिका पर जोर देते हुए कहा बाकि समाज अगर इसमें अपना योगदान नहीं देगा, संघ को मूकदर्शक बनकर देखता रहेगा तो समय भी अधिक लगेगा और सार्थक परिणाम भी देरी से आएंगे। उन्होंने अपने व्याख्यान में सरसंघचालक जी के आह्वान का समर्थन करते हुए लिखा है कि पूरे समाज को इन पांच कार्यों में से अपनी पसंद का कोई भी एक कार्य चुनकर उसमें जुट जाना चाहिए।
बिना शाखा गए भी संघ के अंग हैं
पटेल ने अपनी पोस्ट के अंत में संघ की यात्रा, पद्धति, अनुशासन और कार्यकर्ता के श्रम को नमन किया। उन्होंने कहा कि लाखों लोगों ने अपना श्रम लगाया और कई लोगों ने तो अपना पूरा जीवन घर-परिवार की चिंता छोडक़र लगाया, जिसका प्रतिफल आज समाज जीवन में परिवर्तन और गौरव के रूप में महसूस हो रहा है। उन्होंने निष्कर्ष रूप में कहा अब अगर हम सब पांच में से एक-एक कार्य अपने निज जीवन में जोड़ लें और उस कार्य की प्राथमिकता तय कर लें तो निश्चय ही हम बिना शाखा गए भी संघ के अंग हैं।

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