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‘सरकारी सर्कस’, 135 रुपए की डायरी में ‘भ्रष्टाचार’ की भारी चूक

भोपाल. डिजिटल इंडिया के दौर में मध्य प्रदेश सरकार की नई शासकीय डायरी 2026 चर्चा का विषय बनी हुई है, लेकिन यह चर्चा किसी खूबी के लिए नहीं, बल्कि अफसरों की उस बड़ी लापरवाही के लिए है जिसने सरकार की साख पर सवाल खड़े कर दिए हैं. 135 रुपए की इस डायरी में न तो अफसरों के सही नाम हैं और न ही संपर्क सूत्र.
हैरानी की बात देखिए परिवहन, जेल, कृषि, श्रम और स्कूल शिक्षा जैसे आधा दर्जन से ज्यादा महत्वपूर्ण विभागों के प्रमुख सचिवों के नाम, पद और मेल आईडी ही गायब हैं. हद तो तब हो गई जब डायरी में उन अफसरों के नाम भी छाप दिए गए जो महीनों पहले सेवानिवृत्त हो चुके हैं, जिस डायरी का उपयोग प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले छात्र और आम जनता सटीक जानकारी के लिए करती है, वही अब भ्रामक जानकारी का पुलिंदा बन गई है.
इधर इस मामले में कांग्रेस प्रवक्ता विवेक त्रिपाठी ने सरकार को घेरते हुए कहा कि यह सरकार नहीं सर्कस चल रहा है. करोड़ों रुपए खर्च करके ऐसी डायरी छापी गई जिसमें मंत्रियों और अफसरों के फोन नंबर तक नहीं हैं. क्या सरकार आम जनता की शिकायतों से डर रही है. यह सीधे तौर पर भ्रष्टाचार और लापरवाही का मामला है. हम मांग करते हैं कि इसे तुरंत वापस लिया जाए और दोषियों पर कार्रवाई हो.
मामले के तूल पकड़ते ही सत्ता पक्ष अब बचाव की मुद्रा में है. बीजेपी का कहना है कि यह केवल एक तकनीकी त्रुटि हो सकती है.
बीजेपी प्रवक्ता शिवम शुक्ला ने कहा कि अगर डायरी में कोई प्रिंटिंग मिस्टेक या तथ्यात्मक त्रुटि हुई है तो उसे संज्ञान में लेकर निश्चित तौर पर सुधारा जाएगा.
सवाल सिर्फ एक डायरी का नहीं है, सवाल उस सिस्टम का है जिसने करोड़ों रुपए खर्च करने के बाद भी जनता को आधी-अधूरे और गलत आंकड़े थमा दिए. अब देखना होगा कि इस भ्रामक डायरी के दोषियों पर गाज गिरती है या इसे महज एक छपाई की गलती मानकर रफा दफा कर दिया जाता है.

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