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सीएम डॉ. यादव की सरकारी खर्चों पर लगाम, ‘पुरानी गाड़ी’ से काम चलाएंगे मंत्री-अफसर

भोपाल. मध्य प्रदेश सरकार ने वित्तीय अनुशासन बनाए रखने के लिए खर्चों में कटौती का एक बड़ा प्लान जारी किया है. आगामी शीतकालीन सत्र से पहले वित्त विभाग ने जो खाका तैयार किया है, वह सीधा मंत्रियों और वरिष्ठ अधिकारियों की सुविधाओं पर असर डालने वाला है.
दरअसल सरकार जल्द ही शीतकालीन सत्र में सेकंड सप्लीमेंट्री बजट लाने जा रही है. इसी के मद्देनजर वित्त विभाग ने सभी विभागों को स्पष्ट गाइडलाइन जारी कर दी है कि वे बड़े स्तर पर अपने खर्चों में कटौती करें.
प्रमुख निर्देश ये हैं
नई कार खरीदी पर रोक: आगामी 6 महीनों तक किसी भी सूरत में नई कारों की खरीदी नहीं की जा सकेगी. मंत्रियों से लेकर बड़े अधिकारियों तक को अब अपनी पुरानी गाडिय़ों से ही काम चलाना होगा.
अनुपूरक बजट में सख्ती: विभागों से कहा गया है कि अनुपूरक बजट में केवल उन्हीं प्रस्तावों को शामिल किया जाए, जिनके लिए आकस्मिकता निधि से अग्रिम राशि पहले ही स्वीकृत की जा चुकी है और जिस पर वित्त विभाग की मंजूरी जरूरी है.
नए मदों पर प्रतिबंध: सप्लीमेंट्री बजट में किसी भी कीमत पर नए मदों के प्रस्ताव शामिल नहीं किए जाएंगे. मसलन गाडिय़ों की खरीदी जैसे नए खर्च के लिए कोई प्रस्ताव स्वीकार नहीं होगा.
केंद्रीय योजनाओं पर फोकस: जिन केंद्रीय योजनाओं में पर्याप्त राशि उपलब्ध है, वे जारी रहेंगी। लेकिन यदि राशि की कमी होती है तो विभाग अपनी प्रचलित योजनाओं से कटौती करके पैसा नहीं ले पाएंगे.
केंद्र से ऋण और अनुदान की जानकारी: केंद्र प्रवर्तित योजनाओं पर काम कर रहे विभागों को अगले 6 महीनों में केंद्र से मिलने वाली ऋण और अनुदान राशि की अलग-अलग जानकारी देनी होगी. यह सख्ती इसलिए बरती जा रही है ताकि 4.25 लाख करोड़ के मूल बजट के बाद बार-बार बड़े अनुपूरक बजट लाने पर सवाल न उठे. यानी साफ है सरकार अब वित्तीय अनुशासन को लेकर बेहद सख्त है. इस कटौती प्लान से विकास कार्यों को गति देने और फिजूलखर्ची पर लगाम लगाने की कोशिश की जा रही है.

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