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नक्सलवाद पर जीत, पर अब ‘सफेद जहर’ की चुनौती, एमपी में फैला नशे का जाल

भोपाल। मध्य प्रदेश में एक तरफ जहां नक्सलवाद दम तोड़ रहा है, वहीं दूसरी तरफ सिंथेटिक ड्रग्स के रूप में एक नया और खतरनाक खतरा सामने आ रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बालाघाट से ‘लाल सलाम’ नक्सलवाद के खात्मे का ऐलान तो कर दिया है, लेकिन प्रदेश के युवाओं को नशे के नागपाश से बचाना अब सरकार और पुलिस के लिए बड़ी चुनौती बन गया है।
हाल के आंकड़ों ने सुरक्षा एजेंसियों की नींद उड़ा दी है। भोपाल अब धीरे-धीरे ड्रग्स का हब बनता जा रहा है। अक्टूबर 2024 बगरोदा में 1814 करोड़ रुपये की एमडी ड्रग्स पकड़ी गई। अगस्त 2025 में जगदीशपुर में 92 करोड़ का नशीला पदार्थ जब्त हुआ। ताजा मामलों में आगर-मालवा और मंदसौर के खेतों में अवैध लैब मिली हैं, जहां मौत का यह सामान तैयार किया जा रहा था।
अफीम छोड़ सिंथेटिक ड्रग्स की ओर बड़े तस्कर
जानकारों के मुताबिक तस्कर अब पारंपरिक अफीम की खेती छोडक़र एमडी सिंथेटिक ड्रग्स की ओर रुख कर रहे हैं। इसका सबसे बड़ा कारण मुनाफा है, एमडी ड्रग्स में अफीम की तुलना में 10 गुना ज्यादा कमाई होती है। इस काले कारोबार के तार गुजरात, मुंबई और राजस्थान जैसे राज्यों से जुड़े हैं।
पुलिस का ‘ऑपरेशन क्रिस्टल ब्रेक’
इस बढ़ते खतरे को देखते हुए डीजीपी कैलाश मकवाणा ने एनसीबी और डीआरआई के साथ मिलकर ऑपरेशन क्रिस्टल ब्रेक शुरू किया है। इसका उद्देश्य नशे के इस अंतरराष्ट्रीय सिंडिकेट को जड़ से उखाडऩा है।
गमाई सियासत
इधर इस मामले में अब सियासत भी शुरू हो गई है। कांग्रेस के प्रदेश प्रवक्ता प्रदीप अहिरवार ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि सरकार लाल सलाम के खात्मे की बात करती है, लेकिन प्रदेश का युवा नशे की गिरफ्त में जा रहा है। यह पूरी तरह इंटेलिजेंस का फेलियर है।
– दूसरी ओर बीजेपी के प्रदेश प्रवक्ता अजय यादव ने सफाई देते हुए कहा कि हमारी सरकार लगातार कार्रवाई कर रही है। नशे के सौदागरों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा।
– जबकि वरिष्ठ पत्रकार दिनेश गुप्ता कहते हैं कि पुलिस कार्रवाई सराहनीय है, जिस तरह से युवा नशे की गिरफ्त जा रहे हैं, उन्हें बचाने के लिए सरकार की यह पहल रंग लाएगी, यह शुभ संकेत हैं।

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